बिम्सटेक

नेपाल ने बिम्सटेक सैन्य युद्ध अभ्यास में भाग लेने से किया इनकार

नेपाल ने पहले बिम्सटेक सैन्य अभ्यास में भाग लेने से इनकार कर दिया है। पहले बिम्सटेक सैन्य अभ्यास “MILEX-18” का आयोजन पुणे में किया जा रहा है, यह युद्ध अभ्यास 10 सितम्बर, 2018 को शुरू हुआ।

कारण

नेपाल ने बिम्सटेक सैन्य युद्ध में भाग न लेने का कारण बताया है कि सैन्य अभ्यास बिम्सटेक के एजेंडे में नहीं है। और यह नेपाल के इतिहास के विरुद्ध है, नेपाल अपने सभी पड़ोसियों से समान दूरी बनाये रखता है। बिम्सटेक युद्ध अभ्यास में नेपाल के भाग न लेने का एक अन्य प्रमुख कारण राजनैतिक भी है। नेपाल का यह निर्णय उस समय आया है जब नेपाल और चीन के सम्बन्ध काफी मज़बूत हो रहे हैं। बिम्सटेक कनेक्टिविटी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक किस्म का प्रतिद्वंदी है।

बिम्सटेक युद्ध अभ्यास

इस युद्ध अभ्यास का उद्देश सदस्य देशों द्वारा आतंक विरोधी ऑपरेशन के लिए  सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना है। इस युद्ध अभ्यास में सदस्य देशों की सेनाओं द्वारा अपने अनुभव तथा कौशल को साझा किया जायेगा। इस युद्ध अभ्यास में खोज व कार्डन ऑपरेशन, IED को निष्क्रिय करना तथा अन्य गतिविधियाँ की जाएँगी। इस युद्ध अभ्यास में नेपाल के अलावा अन्य सभी बिम्सटेक सदस्य देश भाग ले रहे हैं। बिम्सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है, इसमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं। बिम्सटेक विश्व की 22% जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करता है, इसके सदस्य देशों की संयुक्त जीडीपी 2.8 ट्रिलियन डॉलर है।

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काठमांडू घोषणा के साथ चौथे बिम्सटेक सम्मेलन का हुआ समापन

काठमांडू डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर करने के बाद बिम्सटेक के चौथे सम्मेलन का समापन हुआ। बिम्सटेक के सभी सात सदस्यों (भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) ने काठमांडू डिक्लेरेशन को स्वीकार किया। इस दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अगले बिम्सटेक सम्मेलन की अध्यक्षता श्रीलंका के राष्ट्रपति मैथ्रीपाला सिरीसेना को सौंपी। इस शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक के सदस्य देशों ने बिम्सटेक ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये।

काठमांडू डिक्लेरेशन

18 बिंदु वाले काठमांडू डिक्लेरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में आर्थिक व तकनीकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर बिम्सटेक सचिवालय की प्रभावशीलता में वृद्धि करना है। इस डिक्लेरेशन में क्षेत्र के आर्थिक व सामाजिक विकास में व्यापार और निवेश की भूमिका को स्वीकार किया गया। इसमें विश्व के सभी भागों में हुए आतंकवादी घटनाओं की भर्त्सना की गयी।

इस डिक्लेरेशन में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने में की प्रतिबद्धता को सशक्ति बनाने पर बल दिया गया। इसके अलावा बिम्सटेक देशों के बीच अपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहयोग पर बल दिया गया। बिम्सटेक देशों ने हाईवे, रेलवे, जलमार्ग तथा हवाई मार्ग के द्वारा क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने का कार्य किया जायेगा। इसके अलावा बिम्सटेक तटीय शिपिंग समझौते तथा बिम्सटेक मोटर व्हीकल समझौते के लिए निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए बल दिया गया।

इसके अलावा बिम्सटेक विकास फण्ड की स्थापना पर भी विचार-विमर्श किया गया, इस फण्ड का उपयोग अनुसन्धान व नियोजन प्रोजेक्ट्स तथा अन्य गतिविधियों के लिए किया जायेगा। इस दौरान बिम्सटेक मुक्त व्यापार क्षेत्र पर भी वार्ता शुरू हुई।

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