भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान

भारत के GSAT-30 उपग्रह को फ्रेंच गुयाना से लांच किया जायेगा

17 जनवरी, 2020 को भारत के GSAT-30 उपग्रह को फ्रेंच गुयाना से लांच किया जायेगा, इसे एरियनस्पेस द्वारा लांच किया जायेगा। इस उपग्रह की सहायता से INSAT-4A को रीप्लेस किया जायेगा।

GSAT-30 उपग्रह एक संचार उपग्रह है। यह सैटेलाइट 15 वर्षों तक कार्य करेगा। इसका निर्माण इसरो ने किया है। इस उपग्रह का उपयोग DTH टेलीविज़न सेवाओं, सेलुलर कनेक्टिविटी, टेलीविज़न अपलिंक इत्यादि में किया जायेगा। इस सैटेलाइट को एरियन 5 राकेट की सहायता से लांच किया जायेगा।

एरियन स्पेस

एरियनस्पेस एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है, इसकी स्थापना 1980 में की गयी थी। यह विश्व की पहली वाणिज्यिक लांच सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है। इसका मुख्यालय कोर्कोनेस, एसोन, फ्रांस में स्थित है। इसके प्रमुख लांच व्हीकल्स हैं: एरियन 5, सोयुज़-2 और वेगा।
मई, 2017 के डाटा के अनुसार एरियनस्पेस अब तक 254 उड़ानों में 550 से अधिक सैटलाइट लांच कर चुका है। भारी सैटेलाइट्स को लांच करने के लिए इसरो भी एरियनस्पेस की सेवाओं का उपयोग करता है। एरियन स्पेस का वेगा राकेट चार चरणों वाला राकेट है, इसका निर्माण छोटे वाणिज्यिक उपग्रहों को लांच करने के लिए किया गया है। इस राकेट की ऊंचाई 30 मीटर है, यह 2500 किलोग्राम तक का पेलोड अन्तरिक्ष में ले जाने में सक्षम है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।
80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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इसरो तमिलनाडु में SSLV के लिए दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा

इसरो दक्षिण तमिलनाडु में तूतिकोड़ी में दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा। इसके लिए तमिलनाडु सरकार लगभग 2300 एकड़ भूमि की व्यवस्था करेगी। इस नए पोर्ट से स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) लांच किये जायेंगे। SSLV की सहायता से 500 किलोग्राम तक के पेलोड को अन्तरिक्ष में ले जाया जा सकता है।

स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल

छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत पर लांच करने के लिए SSLV (स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल) विकसित कर रहा है। SSLV से छोटे सैटेलाइट्स को लांच करने के लगने वाले समय व लागत में कमी आएगी। वर्तमान समय में छोटे सैटेलाइट्स के लांच का ट्रेंड काफी प्रचलन में है। वर्तमान में इसरो छोटे सैटेलाइट्स को बड़े सैटेलाइट्स के साथ PSLV और GSLV जैसे बड़े लांच व्हीकल में ही लांच करता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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