भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान

कैबिनेट ने मास्को में इसरो तकनीकी संपर्क इकाई की स्थापना को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रूस की राजधानी मास्को में इसरो तकनीकी संपर्क इकाई की स्थापना के लिए मंज़ूरी दी है। इस इकाई की स्थापना 2022 के मिशन गगनयान में रूसी साझेदारी के मध्यनजर की गयी है। इससे भारत और रूस के बीच अंतिरक्ष के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

यह इस प्रकार की छठवीं संपर्क इकाई है, इससे पहले अन्तरिक्ष विभाग ने वाशिंगटन और पेरिस में भी तकनीकी संपर्क इकाईयां स्थापित की हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSlL) का उद्घाटन किया गया

23 मई, 2019 को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का उद्घाटन बंगलुरु में किया गया, यह भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक शाखा है। यह अन्तरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में निजी उद्यम को बढ़ावा देगी। यह तकनीक हस्तांतरण मैकेनिज्म के द्वारा स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) तथा PSLV के विकास व उत्पादन का कार्य करेगी। यह वैश्विक वाणिज्यिक SSLV मार्केट की मांग को पूरा करने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

6 मार्च, 2019 को अन्तरिक्ष विभाग ने इसरो ने अपनी दूसरी इकाई NSIL का पंजीकरण किया था। अन्तरिक्ष विभाग का पहला वाणिज्यिक वेंचर एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड था, इसकी स्थापना सितम्बर, 1992 में की गयी थी। NSIL के द्वारा इसरो के अनुसन्धान व विकास कार्य का वाणिज्यीकरण किया जाएगा। NSIL को 100 करोड़ रुपये की शेयर कैपिटल प्रदान की गयी है, इसे 10 करोड़ रुपये की पेड-अप कैपिटल प्रदान की गयी है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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