भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान

इसरो तथा भेल द्वारा अंतरिक्ष ग्रेड की लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन के लिए हस्तांतरण समझौता किया गया |

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (इसरो) ने अंतरिक्ष कार्यों में प्रयोग होने वाली लिथियम-ऑयन बैटरियों के उत्‍पादन हेतु भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्‍स लिमिटेड (भेल) के साथ प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण का करार किया है। ली-ऑयन बैटरी प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण से भेल बैटरियों के विनिर्माण में सक्षम हो जाएगा जिससे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अन्‍य कार्यों के लिए भी ली-ऑयन बैटरियों के विनिर्माण के लिए यह तकनीक अपनायी जा सकेगी। कंपनी इस प्रौद्योगिकी के जरिये अंतरिक्ष स्तर के विभिन्न क्षमता के सेल (बैटरी) का विनिर्माण करेगी. यह कंपनी के कारोबार बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. इसरो ने लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण प्रौद्योगिकी का विकास अपने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में किया है.

इसरो की ली-ऑयन बैटरी

ली-ऑयन बैटरियों का इसरो की ओर से उपयोग उनके अत्‍याधिक ऊर्जा घनत्व, विश्वसनीयता और लंबी अवधि तक चलने के गुणों कारण उपग्रह और अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण के लिए ऊर्जा स्रोतों के रूप में किया जाता है. तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्‍द्र (वीएसएससी) ने अंतरिक्ष संबंधी कार्यों में इस्‍तेमाल होने वाली ली-ऑयन बैटरियों का निर्माण करने की प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक विकसित किया है. इन बैटरियों का इस्‍तेमाल मौजूदा समय ऊर्जा स्रेात के रूप में विभिन्न उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण के लिए किया जाता है.

लाभ

ली-ऑयन बैटरी की प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण से भेल ऐसी बैटरियों के विनिर्माण में सक्षम हो जाएगा जिससे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी. अन्‍य कार्यों के लिए भी राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ली-ऑयन बैटरियों के विनिर्माण के लिए यह तकनीक अपनायी जा सकेगी.

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