भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन

इसरो ने जारी की चंद्रयान-2 की पहली तस्वीरें

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने हाल में चंद्रयान-2 की पहली तस्वीरें जारी की दी हैं। यह तस्वीरें बंगलुरु में उपग्रह एकीकरण व परीक्षण फैसिलिटी से जारी की गयी है। चंद्रयान-2 के लैंडर का नाम “विक्रम” रखा गया है, यह चन्द्रमा की सतह पर उतरेगा। गौरतलब है कि इसरो 15 जुलाई को मिशन चंद्रयान-2 को लांच करेगा।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है। यह डाटा पृथ्वी तक ऑर्बिटर के द्वारा भेजा जायेगा फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

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इसरो ने लांच किया RISAT-2B सैटेलाइट

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने आज  राडार इमेजिंग सैटेलाइट “RISAT 2B” को लांच किया। पहले इस सैटेलाइट को 2020 में RISAT-2A के बाद लांच करने की योजना थी। यह उपग्रह दिन तथा रात में पृथ्वी के हाई रेजोल्यूशन चित्र ले सकता है। यह उपग्रह आसमान में बादल होने के बावजूद भी चित्र ले सकता है। यह एक जासूसी उपग्रह है, यह भारत की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है। इसके द्वारा पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के कैंप पर नजर रखी जा सकती है।

मुख्य बिंदु

  • इस उपग्रह को PSLV-C46 द्वारा लांच किया जाएगा, यह PSLV राकेट का रीयूज़ेबल संस्करण है।
  • इस उपग्रह को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा।

RISAT श्रृंखला

20 अप्रैल, 2009 को RISAT-2 को कक्षा में स्थापित किया गया था। इसके बाद RISAT-1 को 26 अप्रैल, 2012 को लांच किया गया था, इसे पांच वर्ष के लिए प्रक्षेपित किया गया था। इसे PSLV-C19 द्वारा 536 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया था।

महत्व

RISAT उपग्रह पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह हैं, यह सभी प्रकार के मौसम में अपना कार्य कर सकते हैं। यह उपग्रह निगरानी के लिए सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR) का उपयोग करते हैं। यह उपग्रह दिन और रात में काम कर सकते हैं, इसके द्वारा ख़राब मौसम में भी निगरानी की जा सकती है। सीमा पर घुसपैठ पर नज़र बनाये रखने के लिए यह उपग्रह सेना के लिए काफी उपयोगी है।

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