भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन

इसरो ने पुनः किया मिशन चंद्रयान-2 स्थगित

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 मिशन को स्थगित कर दिया है, इससे पहले इसरो ने जनवरी के आरम्भ में चंद्रयान-2 को लांच करने की योजना बनायीं थी, परन्तु साल एक अंत तक इसरो ने कई और लांच भी किये, जिस कारण चन्द्रयान को पुनः स्थगित किया गया है। इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने कहा है कि आने वाले 10-15 में लांच की नयी तिथि की घोषणा की जा सकती है। इस मिशन को तीसरी बार स्थगित किया गया है। पहले इस मिशन को अप्रैल 2018 में लांच किया जाना था, बाद में लांच की तिथि अक्टूबर, 2018 निश्चित की गयी थी।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है। यह डाटा पृथ्वी तक ऑर्बिटर के द्वारा भेजा जायेगा फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

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इसरो ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के साथ अन्तरिक्ष विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये

इसरो (भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन) ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के साथ अन्तरिक्ष विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये। यह जम्मू-कश्मीर में इस प्रकार का पहला संस्थान होगा।

अन्तरिक्ष विज्ञान

इसमें विज्ञान की विभिन्न शाखाओं जैसे, गणित, भौतिकशास्त्र, खगोलशास्त्र, रसायनशास्त्र, जीवविज्ञान, भूगर्भ शास्त्र, ग्रहीय विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, भूगोल, अन्तरिक्ष इत्यादि शामिल हैं।

सतीश धवन अन्तरिक्ष विज्ञान केंद्र

इस केंद्र का नाम देश की महान वैज्ञानिक सतीश धवन पर रखा गया है, वे 1971-84 के बीच इसरो के चेयरमैन रहे। उनका जन्म श्रीनगर में हुआ था। भारत में स्वदेशी अन्तरिक्ष कार्यक्रम के विकास में उनकी भूमिका अति महत्वपूर्ण थी। इस केंद्र में जियोस्पेशिअल डाटा विश्लेषण के लिए सुविधा होगी, इसका उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के धारणीय उपयोग तथा भूमि उपयोग के पैटर्न के अध्ययन के लिए किया जायेगा।

इस केंद्र में वायुमंडलीय अध्ययन के लिए भूमि पर निगरानी क्षेत्र, खगोल विज्ञान तथा ग्लेशियर के अध्ययन  के  लिए अनुसन्धान प्रयोगशाला भी होगी। इस केंद्र में एक आपदा प्रबंधन केंद्र भी स्थापित किया जायेगा, इस केंद्र में बाढ़, भूस्खलन, जंगलो में आग, सूखा तथा जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में शोध कार्य किया जायेगा।

महत्व

इस केंद्र की सहायता से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्पेस एप्लीकेशन की क्षमता का उपयोग आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार, मौसम पूर्वानुमान तथा भूमि उपयोग नियोजन के लिए किया जायेगा। इससे राज्य के युवाओं को भी अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने का मौका मिलेगा।

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