भारतीय अर्थव्यवस्था

मई 2020 में आठ कोर इंडस्ट्रीज की विकास दर में 23.4% की गिरावट दर्ज की गयी

मई 2020 के महीने के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक पर 30 जून, 2020 को जारी किया गया। यह सूचकांक आर्थिक मामलों के कार्यालय (उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के अधीन) द्वारा जारी किया गया था। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में शामिल कुल वस्तुओं में से आठ कोर इंडस्ट्रीज में कुल 40.27 प्रतिशत भार शामिल है।  आठ मुख्य उद्योग हैं: (i) कोयला (ii) कच्चा तेल (iii) प्राकृतिक गैस (iv) रिफाइनरी उत्पाद (v) उर्वरक (vi) स्टील (vii) सीमेंट (viii) विद्युत

मुख्य बिंदु

अप्रैल 2020 में आठ कोर इंडस्ट्रीज की वृद्धि दर -37 प्रतिशत से मई 2020 में -23.4 प्रतिशत हो गई है। नकारात्मक वृद्धि दर अप्रैल और मई 2020 के महीनों में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के प्रभावों के कारण है।  2020 में आठ कोर इंडस्ट्रीज की विकास दर:

जनवरी: +2.2 प्रतिशत

फरवरी: +6.4 प्रतिशत

मार्च: -9.0 प्रतिशत

अप्रैल: -37 प्रतिशत

मई: -23.6 प्रतिशत

आठ कोर इंडस्ट्रीज में, केवल उर्वरक उद्योग मई 2019 की तुलना में मई 2020 के महीने में वृद्धि दर में वृद्धि दर्ज करने में सक्षम रहा। बाकी सभी 7 उद्योगों में गिरावट देखी गई है।  मई 2020 में, मई 2019 की तुलना में, स्टील इंडस्ट्रीज ने आठ कोर इंडस्ट्रीज के बीच सबसे अधिक 48.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।

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COVID-19: भारत की पांचवीं मंदी

1947 में आजादी के बाद से भारत ने चार मंदी का सामना किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, मंदी 1958, 1966, 1973 और 1980 में हुई थी।

मुख्य बिंदु

मंदी को देश की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ बिक्री, आय और रोजगार में गिरावट के रूप में परिभाषित किया गया है। भारत ने अब तक चार ऐसी नकारात्मक जीडीपी वृद्धि देखी है। 1958 में, जीडीपी की वृद्धि 1.2% थी, 1966 में यह -3.6% थी, 1973 में यह -0.32% थी और 1980 में जीडीपी की वृद्धि -5.2% थी।

1958: भुगतान संतुलन संकट

1957 में भारत को जो मंदी का सामना करना पड़ा, वह संतुलन की समस्या के कारण था। यह मुख्य रूप से कमजोर मानसून के कारण था जिसने कृषि उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया। भारत ने तब 60 लाख टन अनाज का आयात किया था।

1966: सूखा

भारत ने 1962 में चीन के साथ और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़े। युद्धों ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया और अंततः सूखे का कारण बना। 1966 में सूखे के कारण खाद्यान्न उत्पादन 20% तक गिर गया।

1973: उर्जा संकट

1973 में, दुनिया को अपने पहले ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा। OAPEC (अरब पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) ने तेल आर्थिक प्रतिबन्ध की घोषणा की। इस संगठन ने उन देशों को निशाना बनाया जो इजरायल का समर्थन करते थे। इससे तेल की कीमतों में लगभग 400% की वृद्धि हुई। भारत का तेल आयात 1972 में 414 मिलियन डालर से बढ़कर 1973 में 900 मिलियन डालर हो गया।

1980: ऑयल शॉक

1980 में दुनिया ने दूसरी बार आयल शॉक देखा। यह ईरानी क्रांति के कारण तेल उत्पादन में कमी के कारण हुआ था। क्रांति के बाद हुए ईरान-इराक युद्ध के कारण यह और बढ़ गया। इससे भारत के लिए भुगतान शेष संकट पैदा हो गया।

COVID-19 संकट

भारत के सामने मौजूदा आर्थिक संकट पिछले सभी मंदी के मुकाबले सबसे खराब है। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को उम्मीद है कि भारत की विकास दर में 5% से 6.8% की गिरावट आएगी।

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