भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण

अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है भारत का 35% ग्रेफाइट भण्डार : GSI रिपोर्ट

जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है, यह अब तक खोजी गयी ग्रेफाइट की सर्वाधिक मात्रा है।

मुख्य बिंदु

हाल ही में जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में इस डाटा को प्रस्तुत किया। वर्तमान में भारत अन्य देशों से ग्रेफाइट का आयात करता है। अरुणाचल प्रदेश में भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार मिलने के बाद अरुणाचल प्रदेश को देश का अग्रणी ग्रेफाइट उत्पादक राज्य बनाया जा सकता है, इससे देश की ग्रेफाइट आवश्यकता को भी पूर्ण किया जा सकता है। इस ग्रेफाइट के उत्पादन के लिए ड्रिलिंग भारत-चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर की जायेगी।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India)

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में की गयी थी, शुरू में इसकी स्थापना रेलवे के लिए कोयले के भंडार खोजने के लिए की गयी थी। वर्षों के पश्चात् अब GSI भूविज्ञान सूचना का एक विशाल भंडार बन गया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भू-विज्ञानिक संगठन के रूप में उभर कर आया है।

यह संगठन केन्द्रीय खनन मंत्रालय के साथ कार्य करता है। यह राष्ट्रीय भू-विज्ञानिक सूचना का एकत्रीकरण तथा अपडेट करने का कार्य करता है। यह ज़मीनी सर्वेक्षण, हवाई व समुद्री सर्वेक्षण के द्वारा खनिज संसाधन का आकलन करता है। इसके अतिरिक्त यह भूकंप गतिविधियों का अध्ययन, प्राकृतिक आपदा का अध्ययन, हिमखंड विज्ञान इत्यादि विभिन्न विषयों पर अध्ययन करता है।

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भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश भर में 22 जीपीएस स्टेशनों की स्थापना की

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश भर में 22 जीपीएस स्टेशनों की स्थापना की। इन स्टेशनों का उपयोग भूकंप की दृष्टि से खतरनाक क्षेत्रों की पहचान करने के लिए किया जाएगा, इससे मानचित्रण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

भूमिसंवाद : खनन मंत्रालय ने भू-वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय के छात्रों के बीच संवाद के लिए भूमिसंवाद नामक एप्प लांच की।

जीपीएस स्टेशन

22 जीपीएस स्टेशनों की स्थापना निम्नलिखित स्थानों पर की गयी है : कलकत्ता, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जबलपुर, भुबनेश्वर, पटना, रायपुर, भोपाल, चंडीगढ़, गांधीनगर, विशाखापट्नम, अगरतला, ईटानगर मंगन, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, शिलोंग तथा लिटिल अंदमान।

इसके अतिरिक्त 13 अन्य जीपीएस स्टेशनों की स्थापना अग्रलिखित स्थानों पर की जायेगी : आइजोल, फरीदाबाद, उत्तरकाशी, पिथोरागढ़, कूचबिहार, ज़वर, नार्थ अंडमान, मिडिल अंडमान, साउथ अंडमान, रांची, मंगलोर, इम्फाल तथा चित्रदुर्गा।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में की गयी थी, शुरू में इसकी स्थापना रेलवे के लिए कोयले के भंडार खोजने के लिए की गयी थी। वर्षों के पश्चात् अब GSI भूविज्ञान सूचना का एक विशाल भंडार बन गया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भू-विज्ञानिक संगठन के रूप में उभर कर आया है।

यह संगठन केन्द्रीय खनन मंत्रालय के साथ कार्य करता है। यह राष्ट्रीय भू-विज्ञानिक सूचना का एकत्रीकरण तथा अपडेट करने का कार्य करता है। यह ज़मीनी सर्वेक्षण, हवाई व समुद्री सर्वेक्षण के द्वारा खनिज संसाधन का आकलन करता है। इसके अतिरिक्त यह भूकंप गतिविधियों का अध्ययन, प्राकृतिक आपदा का अध्ययन, हिमखंड विज्ञान इत्यादि विभिन्न विषयों पर अध्ययन करता है।

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