भारतीय रिजर्व बैंक

RBI में नीतिगत दरों में नहीं किया कोई बदलाव

भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने  5 अक्टूबर, 2018 को द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा की, इस दौरान RBI ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

मुख्य बिंदु

वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को 6.50 पर ही रखा। जबकि रिवर्स रेपो रेट 6.25% पर स्थित है। आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा समिति के अनुसार महंगाई दर 4% रहने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त वर्तमान वित्त वर्ष के आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में भी कोई बदलाव नहीं किया गया, आर्थिक वृद्धि दर को भी 7.4% पर स्थिर रखा गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त 2019-20 में आर्थिक विकास दर के 7.6% रहने की सम्भावना प्रकट की है।

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है। यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है। जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है। अत: कहा जा सकता है, कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है।

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है। यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है। बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। 1 अप्रैल सन 1935 को इसकी स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई थी।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सुधा बालकृष्णन को पहला मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) नियुक्त किया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सुधा बालकृष्णन को पहला मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) नियुक्त किया है। वे आरबीआई की 12 वीं कार्यकारी निदेशक होंगीं तथा तीन साल का उनका कार्यकाल होगा।

बालकृष्णन पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। इस नियुक्ति से पहले, वे भारत की पहली और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी, नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष थीं ।

मुख्य तथ्य

लेखांकन नीतियों और प्रक्रियाओं के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नया सीएफओ आरबीआई की बैलेंस शीट का प्रभारी होगा। वे सरकार और बैंक खाता विभाग की प्रभारी होंगीं, जो भुगतान और राजस्व संग्रह जैसे सरकारी लेनदेन को संसाधित करता है। वे भारत और विदेशों में आरबीआई के निवेश की भी निगरानी करेगीं।

वे लाभांश की प्रभारी भी होगीं जो आरबीआई सरकार को भुगतान करती है, जो अंतिम बजटीय गणनाओं हेतु महत्वपूर्ण है। आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत, आरबीआई को खराब और संदिग्ध ऋण, संपत्तियों में मूल्यह्रास और कर्मचारियों के बीच योगदान और दूसरों के बीच सुपरन्यूएशन फंड के प्रावधान करने के बाद सरकार को अपना अधिशेष देना होगा।

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