भारतीय रिज़र्व बैंक

मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर कम की गयी

22 मई, 2020 को नीति समिति ने वर्तमान आर्थिक दृष्टिकोण और COVID-19 के प्रभावों की समीक्षा के लिए एक आपातकालीन बैठक आयोजित  की।

मुख्य बिंदु

RBI ने रेपो रेट को 4.4% से घटाकर 4% कर दिया है। इसने रिवर्स रेपो रेट को घटाकर 3.35% कर दिया है।

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य

वैश्विक व्यापार घट रहा है और दुनिया मंदी की ओर बढ़ रही है। भारतीय आर्थिक विकास भी बाजार में तरलता को बढ़ाने की कोशिश कर रही सरकार के बावजूद काफी हद तक धीमा है। शीर्ष छह औद्योगीकृत राज्य जो देश में औद्योगिक उत्पादन का 60% उत्पादित करते हैं, अब लाल क्षेत्र में चुके हैं। यह भारत की वृद्धि को और प्रभावित करेगा क्योंकि लाल क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां अपने पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो रही हैं।

चुनौतियां

ग्रामीण और शहरी मांग नीचे गिर रही है। देश में विनिर्माण गतिविधि COVID-19 से 21% कम हो गई है। इसके अलावा, कोर उद्योगों से उत्पादन में 6.5% की गिरावट आई है।

RBI के उपाय

RBI ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 4 बड़े आर्थिक उपायों की घोषणा की है। इसमें बाजारों के कामकाज में सुधार के उपाय, वित्तीय तनाव कम करने के उपाय, निर्यात और आयात को समर्थन देने के उपाय और राज्य सरकारों द्वारा सामना की जाने वाली वित्तीय बाधाओं को कम करने के उपाय शामिल हैं।

उपाय इस प्रकार हैं :

  • आरबीआई ऋण सुविधाओं की पेशकश के लिए एक और 90-दिवसीय विस्तार प्रदान करेगा।
  • EXIM बैंक को आवंटित 15,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन
  • RBI ने निर्यात क्रेडिट अवधि को 12 महीने से बढ़ाकर 15 महीने कर दिया है
  • ऋण अवधि के मोरेटोरियम को 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है
  • बैंकों की समूह जोखिम सीमा 25% से बढ़कर 30% हो गई है।
  • कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड के नियमों में ढील दी गई है।

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आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट घटाकर 3.75% किया

17 अप्रैल, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक ने 3 मई, 2020 तक लॉक डाउन को बढ़ाए जाने के बाद उपायों की की घोषणा की। भारतीय रिज़र्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को 3.75% तक घटा दिया है। जबकि रेपो रेट को 5.15% से 4.4% कर दिया गया है। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (LTRO) के लिए 50,000 करोड़ रुपये की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु

भारतीय रिज़र्व बैंक ने तरलता कवरेज अनुपात (LCR) को 100% से 80% तक कम कर दिया है। एलसीआर बैंकों द्वारा धारित परिसंपत्तियां हैं जो यह सुनिश्चित करती हैं कि यह अल्पकालिक दायित्वों को पूरा करने सक्षम है।

भारतीय रिज़र्व बैंक SIDBI, NABARD, NHB जैसे संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लॉक डाउन होने के कारण ये संस्थान बाजार से नए संसाधन नहीं जुटा पा रहे हैं।

LTRO 2.0

इस बार LTRO को LTRO 2.0 नाम दिया गया है, क्योंकि इस बार LTRO में सूक्ष्म वित्त और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों  की तरलता जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।

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