भारतीय रिज़र्व बैंक

आरबीआई ने रेपो रेट को अपरिवर्तित 5.15% रखा, जीडीपी विकास दर के अनुमान में आई कमी  

आरबीआई ने रेपो रेट (अल्पकालिक उधार दर) को अपरिवर्तित 5.15% पर रखा है। यह निर्णय आरबीआई की पांचवी द्विमासिक नीति समीक्षा के दौरान लिया गया। वर्तमान में  रेपो रेट 5.15% पर है, यह 2010 के बाद का निम्नतम स्तर है। रिज़र्व बैंक ने जीडीपी विकास दर के अनुमान  को 6.1% से कम करके 5% किया है।

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है। यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है। जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है। अत: कहा जा सकता है कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है।

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है। यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है। बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। 1 अप्रैल सन 1935 को इसकी स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई थी।

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से NPA में वृद्धि: भारतीय रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार की फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण नॉन-परफोर्मिंग एसेट्स में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है। आरबीआई का मत है कि मुद्रा योजना के तहत मंज़ूर किये जाने ऋणों की मॉनिटरिंग की जानी चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • आरबीआई के अनुसार 2017-18 में मुद्रा योजना के ऋण 2.52% थे, 2018-19 में यह आंकड़ा 2.89% हो गया है।
  • 2017 में शिशु श्रेणी में 83,892 ऋण प्रदान किये गये थे, 2019 में इस श्रेणी में 1,39,652 ऋण प्रदान किये गये हैं।  2017 में किशोर श्रेणी के अंतर्गत 51,063 ऋण प्रदान किये गये थे, 2019 में यह आंकड़ा 99868 पर पहुँच गया है।
  • आरबीआई के अनुसार 182 मिलियन मुद्रा ऋण खातों में से 3.63 मिलियन खाते डिफाल्टर हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को 2015 में लांच किया गया था इसका उद्देश्य नॉन-कॉर्पोरेट, नॉन-फार्म सूक्ष्म/लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये का ऋण प्रदान करना है। यह ऋण वाणिज्यिक बैंक,  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, कोआपरेटिव बैंक, MFI तथा NBFC द्वारा प्रदान किया जाते हैं। इस योजना के तहत तीन प्रकार के ऋण प्रदान किये जाते हैं

  • शिशु : 50,000 रुपये तक
  • किशोर : 50,000 से 5 लाख रुपये के बीच
  • तरुण : 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच

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