भारतीय रेलवे

CORAS : रेलवे मंत्रालय ने रेलवे सुरक्षा के लिए कमांडो यूनिट लांच की

केन्द्रीय रेलवे मंत्रालय ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा के लिए CORAS (Commando for Railway Security) लांच किया है, यह रेलवे सुरक्षा बल के लिए अलग से एक कमांडो यूनिट है। इसका निर्माण रेलवे सुरक्षा बल तथा रेलवे सुरक्षा विशेष बल में से किया गया है।

CORAS (Commando for Railway Security)

इस बल का गठन रेलवे क्षेत्र के निकट किसी अप्रिय घटना तथा रेलवे की संपत्ति को हानि पहुंचाने से रोकने के लिए किया गया है। इस बल भारतीय रेलवे तथा इसके यात्रियों को पुख्ता सुरक्षा मुहैया करवाएगा।

CORAS की औसत उम्र 30-35 वर्ष के बीच है। इस कमांडो यूनिट को लेफ्ट विंग उग्रवाद तथा आतंकवाद से प्रभावित रेलवे क्षेत्रों तैनात किया जायेगा, यह यूनिट रेलवे नेटवर्क तथा रेलवे यात्रियों को सुरक्षा मुहैया करवाएगा।

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वन्दे भारत एक्सप्रेस ने नई दिल्ली से कटरा के बीच ट्रायल रन पूरा किया

भारतीय रेलवे के उत्तरी रेलवे जोन ने हाल ही में वन्दे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ट्रायल नई दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर के एक कस्बे कटरा के बीच किया गया। वन्दे भारत ने नई दिल्ली और कटरा के बीच की दूरी को मात्र 8 घंटे में तय किया। गौरतलब है कि यह ट्रेन माता वैष्णो देवी के मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। इस ट्रेन को अगस्त से नई दिल्ली और कटरा के बीच चलाया जा सकता है।

वन्दे भारत एक्सप्रेस

ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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