भारतीय वायुसेना

रूस में शुरू हुआ गगनयान के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत में मानव अन्तरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए प्रशिक्षण रूस में शुरू हो गया है। इस मिशन में भारतीय  वायुसेना के चार पायलट हिस्सा लेंगे। इन पायलट्स को रूस में प्रशिक्षण दिया जायेगा।

मिशन गगनयान

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने मिशन गगनयान के लिए दिसम्बर, 2021 को डेडलाइन निश्चित की है। गगनयान के लिए अन्तरिक्षयात्रियों का शुरूआती प्रशिक्षण भारत में ही किया जायेगा, बाद में एडवांस्ड प्रशिक्षण रूस में भी किया जा सकता है। हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने मिशन गगनयान के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी थी। इस मिशन में तीन अन्तरिक्षयात्रियों को अन्तरिक्ष में 5-7 दिनों के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। भारत ऐसा कारनामा करने वाला चौथा देश बनेगा

मिशन के मुख्य बिंदु

गगनयान मिशन की लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये आएगी। यह मिशन पूर्ण रूप से स्वदेशी होगा। इस मिशन के वास्तविक लांच से पहले इसरो बिना मानव के दो मिशन लांच करेगा, पहला मिशन 30 महीने में तथा दूसरा मिशन 36 महीने बाद लांच किया जायेगा।

चरण

गगनयान मिशन के लिए GLSV Mk-III लांच व्हीकल का उपयोग किया जायेगा। मिशन गगनयान के स्पेस क्राफ्ट में एक क्रू मोड्यूल तथा एक सर्विस मोड्यूल होगा। इसका भार लगभग 7 टन होगा। इस मिशन में तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को 5-7 दिन के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। इस स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की कक्षा में 300-400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जायेगा। क्रू मोड्यूल का आकार 3.7 मीटर तथा सर्विस मोड्यूल का आकार 7 मीटर होगा।

परिक्रमा

इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से लांच किया जायेगा। यह स्पेसक्राफ्ट 16 मिनट में अपेक्षित ऊंचाई पर पहुँच जायेगा। इस मिशन के लिए क्रू का चयन भारतीय वायुसेना व इसरो द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। बाद में इस क्रू को 2-3साल तक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

वापसी

वापसी के लिए मोड्यूल के वेग को कम किया जाएगा और इसे विपरीत दिशा में घुमाया जायेगा। जब यह पूरा मोड्यूल पृथ्वी की सतह से 120 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचेगा तो सर्विस मोड्यूल को अलग किया जायेगा। केवल क्रू वाला मोड्यूल ही पृथ्वी पर पहुंचेगा। इसे पृथ्वी पर पहुँचने में लगभग 36 मिनट लगेंगे। इसरो क्रू मोड्यूल को गुजरात के निकट अरब सागर अथवा गुजरात की खाड़ी में लैंड करवाने की योजना बना रहा है।

इस मिशन को भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से लगभग 6 महीने पहले क्रियान्वित किया जायेगा।

गगनयान के लिए इसरो द्वारा विकसित तकनीक

इसरो अन्तरिक्ष में मानव भेजने के लिए महत्वपूण तकनीकों का परिक्षण कर रहा है। इस मिशन को 10,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जायेगा। इसके लिए कई उपकरण तैयार किये जा चुके हैं। इसके लिए हैवी लिफ्ट लांच व्हीकल GSLV मार्क-III, रिकवरी टेक्नोलॉजी, क्रू मोड्यूल, अन्तरिक्ष यात्री प्रशिक्षण व्यवस्था, वातावरण नियंत्रण तथा लाइफ सपोर्ट सिस्टम का सफलतापूर्वक निर्माण कर लिया गया है। दिसम्बर, 2014 में GSLV मार्क-III का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। इसके बाद जून 2017 में GSLV मार्क-III की पहली डेवलपमेंटल उड़ान सफलतापूर्वक भरी थी। जुलाई, 2018 में क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया था। अभी भी कुछ एक टेक्नोलॉजी व उपकरणों का निर्माण किया जाना बाकी है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Month:

Tags: , , , , , , , , , , ,

प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह के सम्मान में डाक टिकट जारी किया  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह के सम्मान में डाक टिकट जारी किया। इसे वायुसेना के ‘एट होम’ कार्यक्रम के दौरान नई दिल्ली में जारी किया गया।

अर्जन सिंह

15 अप्रैल, 1919 में अर्जन सिंह का जन्म लायलपुर (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान) में हुआ था, उनका निधन 16 सितम्बर, 2017 को नई दिल्ली में हुआ था।

वायुसेना करियर : उन्हें 19 वर्ष की आयु में रॉयल एयर फ़ोर्स के एम्पायर पायलट प्रशिक्षण कोर्स के लिए चुना गया था। उन्होंने 15 अगस्त, 1947 को दिल्ली में लाल किले के ऊपर से एक सौ से अधिक विमानों के फ्लाई-पास्ट का नेतृत्व किया था। वे अगस्त, 1964 से 1969 तक वायुसेना प्रमुख रहे। 1966 में वे एयर चीफ मार्शल का रैंक प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बने थे। 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने भारतीय वायुसेना का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने वायुसेना का ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लांच किया था, इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के महत्वपूर्ण नगर अखनूर को निशाना बनाया गया था। अर्जन सिंह अगस्त, 1969 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।

उन्होंने स्विट्ज़रलैंड में भारत के एम्बेसडर के रूप में कार्य किया। 1989-90 के दौरान उन्होंने दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में कार्य किया।

पुरस्कार व सम्मान : भारत सरकार ने 2002 में उन्हें ‘मार्शल ऑफ़ द इंडियन एयरफ़ोर्स’ का रैंक प्रदान किया था। वे प्रथम तथा एकमात्र ‘फाइव स्टार’ रैंक के वायुसेना अधिकारी थे। उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके सम्मान में केंद्र सरकार ने 2016 में पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयर फ़ोर्स बेस का नाम बदलकर ‘एयर फ़ोर्स स्टेशन अर्जन सिंह ‘कर दिया था।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , ,

Advertisement