भारतीय सेना

भारतीय सेना ने एलएसी स्टैंड ऑफ के बीच नागरिकों के लिए सियाचिन घाटी को खोला

27 जुलाई, 2020 को, भारतीय सेना ने घोषणा की कि सियाचिन घाटी को नागरिकों के लिए खोला जायेगा। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच यह फैसला आया है।

मुख्य बिंदु

भारतीय सेना ने अक्टूबर,  2019 में दुनिया का सबसे बड़ा गैर-ध्रुवीय ग्लेशियर सियाचिन को खोला है। जब यह आदेश पारित किया गया था, सर्दियों की शुरुआत हो गई थी और तब पर्यटन का मौसम लगभग खत्म हो गया था। सर्दियों के बाद, भारत और चीन के बीच LAC के साथ-साथ सीमाओं पर तनाव शुरू हो गया।

आर्मी एडवेंचर सेल  सियाचिन क्षेत्र के लिए परमिट जारी करेगी। सियाचिन गालवान घाटी में है। घाटी उन स्थानों में से एक है जहाँ भारतीय और चीनी सेनाएँ आमने-सामने थीं।

पृष्ठभूमि

2007 से, भारत ने सियाचिन बेस कैंप से सियाचिन ग्लेशियरों जैसे ऊंचाई वाले स्थानों पर ट्रेक करने की अनुमति दी। ग्लेशियर 11,000 फीट की ऊंचाई पर है।

भारतीय और चीनी सेना अभी भी स्टैंड ऑफ के बारे में बातचीत कर रहे हैं। वे गालवान घाटी, गोगरा और गर्म झरनों में विघटन के लिए सहमत हुए। हालाँकि, पैंगोंग त्सो झील के मुद्दे पर निष्कर्ष निकाला जाना बाकी है।

सेना का एडवेंचर विंग

AAW सैन्य प्रशिक्षण महानिदेशालय के अंतर्गत कार्य करता है। यह सेना में साहसिक गतिविधियों की योजना, संचालन, प्रचार करता है। वर्तमान में, AAW एयरो, एक्वा और लैंड के तीन क्षेत्रों के तहत 17 विभिन्न साहसिक शिष्यों में साहसिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है।

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26 जुलाई : कारगिल विजय दिवस

26 जुलाई को देश में प्रत्येक वर्ष कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता की याद में मनाया जाता है। 26 जुलाई, 1999 को भारत ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों के कब्ज़े से अपने क्षेत्र को पुनः प्राप्त किया था।

पृष्ठभूमि

फरवरी, 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर में शान्ति के लिए लाहौर समझौता हुआ था। इसी दौरान कुछ पाकिस्तानी घुसपैठिये भारतीय सीमा में प्रवेश कर गये, घुसपैठ के कार्य को ‘ऑपरेशन बद्र’ नाम दिया गया था। पाकिस्तानी घुसपैठ का उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच के संपर्क को काटना था, जिससे भारतीय सेना को सियाचीन ग्लेशियर से वापस हटना पड़े। इन घुसपैठियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया। इस घुसपैठ का दायरा 130 से 200 वर्ग किलोमीटर था।

इस गंभीर सकंट से निपटने के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन विजय’ लांच किया और इस कार्य के लिए 2,00,000 सैनिकों को भेजा गया। 60 तक चले इस ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने अपने क्षेत्र पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह ऑपरेशन 26 जुलाई, 1999 को पूरा हुआ। इस दौरान भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए। इस युद्ध में लगभग 450 पाकिस्तानी घुसपैठियों की मृत्यु हुई थी।

टाइमलाइन

4 मई, 1999 : पाकिस्तानी घुसपैठिये कारगिल को चोटी पर देखे गए

5-15 मई, 1999 : क्षेत्र का मुआयना करने गए कैप्टेन सौरभ कालिया का पाकिस्तान सैनकों ने अपहरण किया, प्रताड़ित करने के बाद उनकी हत्या की गयी।

26 मई, 1999 : MiG 21, MiG 27, जैगुआर और मिराज 2000 द्वारा घुसपैठियों पर हमले किये गये।

15 जून, 1999 : तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को कारगिल से अपने सैनिक वापस हटाने के लिए कहा।

29 जून, 1999  : भारतीय सेना ने टाइगर हिल के निकट दो महत्वपूर्ण स्थानों पर नियंत्रण स्थापित किया।

4 जुलाई, 1999 : आर्टिलरी का उपयोग, टाइगर पर विजय।

5 जुलाई, 1999 : पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कारगिल से सैनिकों की वापसी की घोषणा की।

11 जुलाई, 1999 : पाकिस्तानी सैनिकों की वापसी शुरू।

26 जुलाई, 1999 : सभी पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से खदेड़ दिया गया।

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