भारत ईरान सम्बन्ध

भारत, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान ने चाबहार बंदरगाह पर चर्चा की

भारत, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान ने 20 दिसम्बर को चाबहार बंदरगाह पर नई दिल्ली में चर्चा की। चाबहार बंदरगाह भारत, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के बीच मधुर संबंधों का परिचायक है। इससे तीनों देशों के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। चाबहार बंदरगाह से भारत को अफ़ग़ानिस्तान से व्यापार करने के लिए सरल मार्ग मिलेगा। भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए काफी निवेश किया है।

चाबहार बंदरगाह

चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है, यह बंदरगाह सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह चीन द्वारा पाकिस्तान में निर्मित ग्वादर बंदरगाह से केवल 100 नॉटिकल मील दूर स्थित है। भारत ने सर्वप्रथम 2003 में चाबहार बंदरगाह के विकास का प्रस्ताव रखा था। अफ़ग़ानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुँच बनाने के लिए यह बंदरगाह भारतीय के लिए ‘सुनहरा द्वार’ है। फरवरी, 2018 चाबहार के पहले चरण (शाहिद बेहेश्ती) के क्रियान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे। इस समझौते के तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड नामक भारतीय कंपनी चाबहार बंदरगाह का अंतरिम प्रभार अपने हाथ में लेगी।

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भारत ने ईरान से कच्चे तेल के आयात को रोकने का निर्णय लिया

भारत ने ईरान से कच्चे तेल की आयात को रोकने का निर्णय लिया है, इसके लिए केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

पृष्ठभूमि

ईरान से तेल आयात करने वाले कुछ एक देशों को अमेरिका ने प्रतिबंधों से छूट दी है, इन देशों में भारत भी शामिल है। नयी रिपोर्ट के मुताबिक अब अमेरिका भारत को प्रतिबन्ध से मिलने वाली छूट समाप्त करने जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने जापान, दक्षिण कोरिया, तुर्की, इटली, ग्रीस, चीन तथा भारत को प्रतिबन्ध से छूट दिए जाने के बारे में सूचित कर दिया है। इस छूट की अवधि 2 मई को समाप्त हो रही है।

प्रतिबंधों पर इस छूट को समाप्त करने का उद्देश्य ईरान को अलग-थलग करके दबाव को बढ़ाना है।

अमेरिका का मत है कि ईरान दशकों से मध्य-पूर्व को अस्थिर करने का कार्य कर रहा है, इसलिए ईरान को प्राप्त होने वाली धनराशी को कम करने की आवश्यकता है।

तेल की आपूर्ति

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। भारत को अपनी तेल आवश्यकता का 80% आयात करना पड़ता है। 2017-18 में ईरान (इराक और सऊदी अरब के बाद) भारत के लिए तेल का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था। भारत की तेल की 10% आपूर्ति ईरान द्वारा की जाती है। भारत विभिन्न तेल आपूर्तिकर्ताओं से अतिरिक्त तेल की खरीद करके अपनी आवश्यकता को पूर्ण कर सकता है।

पिछली बार जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के साथ परमाणु डील से अलग होने का निर्णय लिया था तब तेल की कीमते बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गयी थी। बाद में अमेरिकी प्रशासन ने जब अप्रत्याशित छूट की घोषणा की, तब तेल की कीमत गिरकर 50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गयी थी।

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