भारत-जापान सम्बन्ध

श्रीलंका, जापान और भारत ने ईस्ट कंटेनर टर्मिनल पर सहयोग के लिए हस्ताक्षर किये

श्रीलंका, भारत और जापान ने ईस्ट कंटेनर टर्मिनल को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए MoC (Memorandum of Cooperation) पर हस्ताक्षर किये हैं। यह टर्मिनल श्रीलंका के कोलोंबो बंदरगाह में स्थित है।

मुख्य बिंदु

यह तीनों देशों ईस्ट कंटेनर टर्मिनल ने विकास के लिए 2018 से समझौता वार्ता कर रहे थे। यह टर्मिनल चीन के सहयोग से निर्मित की जा रही अंतर्राष्ट्रीय फाइनेंशियल सिटी (पोर्ट सिटी) से मात्र तीन किलोमीटर दूर है।

ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का 100% स्वामित्व श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी (SLPA) का पास ही रहेगा। इस टर्मिनल का कार्य “टर्मिनल ऑपरेशंस कंपनी” द्वारा किया जाएगा, इस कंपनी का स्वामित्व संयुक्त होगा। इस प्रोजेक्ट में श्रीलंका का हिस्सा 51% होगा। शेष 49% हिस्सा भारत और जापान के पास होगा।

इस संयुक्त परियोजना की लागत 500 मिलियन डॉलर से 700 मिलियन डॉलर तक आ सकती है। इसके लिए जापान 40 वर्ष की अवधि के लिए 0.1% ब्याज दर पर सॉफ्ट लोन प्रदान करेगा।

ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का 70% परिवहन कार्य भारत के साथ होगा है, इसलिए इस टर्मिनल का भारत के लिए काफी अधिक वाणिज्यिक महत्व है।

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श्याम सरन को जापान के दूसरे सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार “आर्डर ऑफ़ द राइजिंग सन” से सम्मानित किया जाएगा

भारत के राजनयिक श्याम सरन को जापान के दूसरे सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार “ऑर्डर ऑफ़ द राइजिंग सन, गोल्ड एंड सिल्वर स्टार” से सम्मानित किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

उन्हें यह सम्मान 2019 स्प्रिंग इम्पीरियल डेकोरेशन्स के दौरान प्रदान किया जाएगा। उन्हें यह सम्मान भारत और जापान के बीच संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए प्रदान किया जा रहा है। श्याम सरन 2004-2006 के बीच भारत के विदेश सचिव थे। उनके कार्यकाल में पांच वर्षों में पहली बार तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी भारत की यात्रा पर आये थे। 1988 में जब जापान में “इंडिया फेस्टिवल” का आयोजन किया गया, तब श्याम सरन जापान में भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ थे। 2017 के बाद से श्याम सरन दोनों देशों के बीच आपसी समझ को मज़बूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने “इंडिया-जापान कोलोकियम” की मेजबानी भी की थी।

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