भारत बांग्लादेश सीमा

पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर भारत लगाएगा स्टील फेंस

भारत बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में नॉन-कट स्टील फेंस (बाड़) लगाएगा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर अफ़ग़ान आतंकी पाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

पहले स्टील फेंस को असम के सिलचर में 7 किलोमीटर लम्बी बांग्लादेश सीमा के साथ लगाया जाएगा। स्टील फेंस को लगाये जाने के बाद BSF द्वारा इसका विश्लेषण किया जाएगा। इस बाड़बंदी के क्रियान्वयन के आधार पर अन्य संवेदनशील इलाकों में स्टील फेंस लगायी जायेगी। इस प्रकार की स्टील फेंसिंग लगाने के लिए प्रति किलोमीटर 2 करोड़ रुपये की लागत आती है।

स्टील फेंसिंग के अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर लेज़र फेंस भी लगाने की योजना है। इसके क्रियान्वयन के लिए CIMBMS (Comprehensive Integrated Border Management System) को गति दी गयी है। CIMBMS केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है।

आवश्यकता

सीमा के निकट प्रशिक्षित आतंकियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण घुसपैठ को रोकने के लिए मज़बूत बाड़बंदी आवश्यक है। सीमा पर उचित सुरक्षा  न होने के कारण आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करके समस्या खड़ी कर सकते हैं।

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भारत-बांग्लादेश की बॉर्डर हाट पर संयुक्त समिति की पहली बैठक अगरतला में की गयी आयोजित

भारत और बांग्लादेश की बॉर्डर हाट पर संयुक्त समिति की पहली बैठक अगरतला में आयोजित की गयी। इस संयुक्त समिति ने त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले में कमलासागर बॉर्डर हाट तथा बांग्लादेश के ब्रह्मंबरिया में तारापुर बॉर्डर हाट का मुआयना भी किया।

बैठक के परिणाम

इस दौरान दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि बॉर्डर के नज़दीक रहने वाले लोगों के लिए बॉर्डर हाट काफी लाभदायक है। इस बैठक के दौरान 4 कार्यरत्त बॉर्डर हाट की समीक्षा पर गहन चर्चा की गयी। वर्तमान में चार बॉर्डर हाट कार्यरत्त हैं : कलाईचार (मेघालय, बालत (मेघालय), कमलासागर (त्रिपुरा) आर श्रीनगर (त्रिपुरा।

इस बैठक में इनमे सुधार के लिए कई सुझाव भी प्रस्तुत किये गए। 6 अतिरिक्त बॉर्डर हाट शुरू करने के लिए भी दोनों पक्षों ने समय सीमा निश्चित की तथा आगे बॉर्डर हाट के विस्तार के लिए रोडमैप पर भी चर्चा की गयी। इसकी अगली बैठक बांग्लादेश में आयोजित की जाएगी।

पृष्ठभूमि

बॉर्डर हाट (ग्रामीण बाज़ार) का उद्देश्य भारत-बांग्लादेश की सीमा के निकट रहने वाले लोगों के जीवनस्तर में सुधर लाना है। इसमें पारंपरिक तरीके से स्थानीय उत्पादों को स्थानीय मुद्रा में खरीदा अथवा बीचा जाता है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार में इसका अधिक महत्त्व नहीं है, परन्तु बॉर्डर के निकट रहने वाले लोगों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है, इससे उनकी आर्थिक स्थिति मज़बूत बनेगी। इसके लिए भारत और बांग्लादेश के बीच अक्टूबर, 2010 में एक MoU पर हस्ताक्षर किये गए थे। अप्रैल, 2017 में बॉर्डर हाट के लिए संयुक्त समिति की स्थापना के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच एक अन्य MoU पर हस्ताक्षर किये गए थे।

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