भारत में वायु प्रदूषण

नासा: भारत में वायु प्रदूषण 20 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा

22 अप्रैल, 2020 को नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने घोषणा की कि भारत में वायु प्रदूषण 20 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

मुख्य बिंदु

नासा द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2019 के औसत की तुलना में 2020 में एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ सबसे कम रहा है। वायुमंडल में वायु में मौजूद कणों द्वारा प्रकाश के अवशोषण को एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ कहा जाता है। जब एरोसोल सतह के पास होते हैं, तो 1 या उससे ऊपर की ऑप्टिकल डेप्थ धुंधली स्थितियों का सूचक है। एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ 2016 में 0.7 थी और अब 0.1 तक पहुंच गयी है। इस पैटर्न का अवलोकन MODIS मॉडल द्वारा किया गया है। MODIS का पूर्ण स्वरुप Moderate Resolution Imaging Spectroradiometer  है।

एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ

एरोसोल वायुमंडल में कण होते हैं जो कि उद्योगों, वाहनों और प्राकृतिक घटनाओं जैसे धूल भरी आंधी, आग, आदि के कारण उत्पन्न होते हैं। वायुमंडल में एरोसोल्स की उपस्थिति वायुमंडल में पार्टिकुलेट मैटर से भी प्रभावित होती है।

एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ वायुमंडल में मौजूद एरोसोल का मात्रात्मक माप है। यह वायुमंडल से गुजरने पर प्रकाश के विलुप्त होने को मापता है। जैसे-जैसे एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ बढ़ती है, प्रकाश के विलुप्त होने की दर भी बढ़ जाती है।

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स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 रिपोर्ट

हाल ही में अमेरिकी संस्थानों हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट (HEI) तथा इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IMHE) ने हाल ही में वैश्विक वायु गुणवत्ता पर स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 नामक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों में से आधी मौतें चीन और भारत में होती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि PM 2.5 टाइप 2 मधुमेह का तीसरा सबसे बड़ा कारक है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में PM 2.5 का स्तर चार से पांच गुणा अधिक है।
  • 2017 में दक्षिण एशिया में PM 2.5 सर्वाधिक था। इस क्षेत्र में भूटान में PM 2.5 का स्तर सबसे कम है।
  • जिन 10 देशों में PM 2.5 सबसे कम है : मालदीव, अमेरिका, नॉर्वे, एस्टोनिया, आइसलैंड, कनाडा, स्वीडन, न्यूजीलैंड, ब्रूनेई तथा फ़िनलैंड।
  • विश्व में औसतन वायु प्रदूषण से सामूहिक जीवन आकांक्षा में 1 वर्ष तथा 8 महीने की कमी आई है।

भारत के सन्दर्भ में मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में PM 2.5 के मुख्य स्त्रोत इस प्रकार हैं : घरों में इंधन के ज्वलन से निकलने वाला धुआं, निर्माण, सड़क तथा अन्य कार्यों से उत्पन्न होने वाले धुलकण, कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट तथा उद्योग, ईंट उत्पादन, परिवहन, डीजल से चलने वाले उपकरण इत्यादि।
  • 2017 में भारत में 846 मिलियन लोग (60% जनसँख्या) घरेलु वायु प्रदूषण से प्रभावित हुई, चीन में यह आंकड़ा 452 मिलियन (32% जनसँख्या) रहा।

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