भारत में वायु प्रदूषण

स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 रिपोर्ट

हाल ही में अमेरिकी संस्थानों हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट (HEI) तथा इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IMHE) ने हाल ही में वैश्विक वायु गुणवत्ता पर स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 नामक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों में से आधी मौतें चीन और भारत में होती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि PM 2.5 टाइप 2 मधुमेह का तीसरा सबसे बड़ा कारक है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में PM 2.5 का स्तर चार से पांच गुणा अधिक है।
  • 2017 में दक्षिण एशिया में PM 2.5 सर्वाधिक था। इस क्षेत्र में भूटान में PM 2.5 का स्तर सबसे कम है।
  • जिन 10 देशों में PM 2.5 सबसे कम है : मालदीव, अमेरिका, नॉर्वे, एस्टोनिया, आइसलैंड, कनाडा, स्वीडन, न्यूजीलैंड, ब्रूनेई तथा फ़िनलैंड।
  • विश्व में औसतन वायु प्रदूषण से सामूहिक जीवन आकांक्षा में 1 वर्ष तथा 8 महीने की कमी आई है।

भारत के सन्दर्भ में मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में PM 2.5 के मुख्य स्त्रोत इस प्रकार हैं : घरों में इंधन के ज्वलन से निकलने वाला धुआं, निर्माण, सड़क तथा अन्य कार्यों से उत्पन्न होने वाले धुलकण, कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट तथा उद्योग, ईंट उत्पादन, परिवहन, डीजल से चलने वाले उपकरण इत्यादि।
  • 2017 में भारत में 846 मिलियन लोग (60% जनसँख्या) घरेलु वायु प्रदूषण से प्रभावित हुई, चीन में यह आंकड़ा 452 मिलियन (32% जनसँख्या) रहा।

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भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक: रिपोर्ट

हाल ही में ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादक देश है, वर्ष 2017 में भारत ने विश्व का कुल 7% कार्बन  डाइऑक्साइड उत्सर्जन किया। 2018 में भारत के कार्बन उत्सर्जन में 6.3% की वृद्धि हुई, इसमें कोयला (7.1%), तेल (2.9%) तथा गैस (6%) प्रमुख है।

मुख्य बिंदु

विश्व के दस सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जन देश हैं : चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत, रूस, जापान, जर्मनी, ईरान, सऊदी अरब तथा दक्षिण कोरिया। इस अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत और चीन अभी भी काफी हद तक कोयले पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका और यूरोपीय संघ धीरे-धीरे कम कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं।

भारत कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के लिए सौर उर्जा पर निरंतर कार्य कर रहा है, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत को अंतर्राष्ट्रीय सोलर संगठन में अपनी सशक्त भूमिका निभानी होगी। इस अध्ययन रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन 2018 के अवसर पर जारी किया गया। इस रिपोर्ट में 2018 में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि होने का अंदेशा जताया गया है, इसका मुख्य कारण तेल तथा गैस के उपयोग में वृद्धि है।

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