भारत में सौर उर्जा

सरकार ने 2022 तक 40,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना का लक्ष्य रखा

भारत सरकार ने 2022 तक 40,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना का लक्ष्य रखा है, इसमें घर की छतों पर लगाए जाने सोलर पैनल भी शामिल है। दरअसल नवीन व नवीकरणीय उर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने इन सन्दर्भ में राज्यसभा में जवाब दिया है।

मुख्य बिंदु

केन्द्रीय नवीन व नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय द्वारा “ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रोग्राम” का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

भारत में रूफटॉप सोलर इंस्टालेशन : 18 जुलाई, 2019 तक भारत में 1700 मेगावाट के ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सिस्टम स्थापित किये जा चुके हैं। औसतन रूफटॉप सोलर प्लांट से 1.5 मिलियन यूनिट प्रति मेगावाट/वर्ष उर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।

गुजरात मॉडल : रूफटॉप सोलर इंस्टालेशन में क्षेत्रफल के आधार पर गुजरात देशभर में पहले स्थान पर है, गुजरात में 261.97 मेगावाट रूफटॉप सौर उर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। 261.97 मेगावाट में से 183.51 मेगावाट उर्जा का उत्पादन सब्सिडी से प्रदान किये गये उपकरणों से किया जा रहां है। गुजरात के बाद महाराष्ट्र में 198.52 मेगावाट तथा तमिलनाडु में 151.62 मेगावाट सौर उर्जा का उत्पादन रूफटॉप सोलर पैनल से किया जा रहा है।

ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रोग्राम

इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2022 तक रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स से 40,000 मेगावाट उर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करना है।

इस योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में 11,814 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से किया जा रहा है।

दूसरे चरण में 3 किलोवाट के रूफटॉप सिस्टम (रिहायशी रूफटॉप सिस्टम) के लिए केंद्र द्वारा 40% तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि 3 से 10 किलोवाट तक की क्षमता वाले सिस्टम के लिए यह वित्तीय सहायता 20% है।

सोलर रूफटॉप सिस्टम क्या है?

सोलर रूफटॉप सिस्टम घर, दफ्तर, संस्थान अथवा किसी औद्योगिक ईमारत की छत पर लगाया जा सकता है। यह सिस्टम दो प्रकार का होता है :

  • सोलर रूफटॉप सिस्टम जिसमे बैटरी के द्वारा भण्डारण किया जाता है
  • ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटॉप सिस्टम

1.5 मिलियन यूनिट प्रति मेगावाट/वर्ष उर्जा उत्पादन को मध्य नज़र रखते हुए 2022 तक 38 गीगावाट उर्जा का उत्पादन संभव हो सकेगा, इससे प्रतिवर्ष 45.6 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।

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केंद्र सरकार ने सोलर सेल आयात करने पर लगाया 25% संरक्षण शुल्क

केंद्र सरकार ने चीन और मलेशिया से सोलर सेल के आयात पर 25% संरक्षण शुल्क लगाया है। इसका उद्देश्य घरेलु सोलर सेल निर्माता सेक्टर की सहायता करना है। परन्तु इस निर्णय से उन प्रोजेक्ट्स में असर पड़ सकता है जो सस्ती सोलर उपकरण के लिए आयात पर निर्भर थे। भारत में  सोलर पैनल में उपयोग किये जाने वाले 90% सोलर सेल चीन और मलेशिया से आयात किये जाते हैं।

संरक्षण शुल्क सरकार द्वारा आयात पर लगाया जाता है, इसका उद्देश्य आयात के कारण देश के घरेलु क्षेत्र के निर्माताओं को होने वाले नुकसान से बचाना है। आम तौर पर यह एक अस्थायी शुल्क होता है, जिसे घरेलु सेक्टर को नुकसान की सम्भावना बचाने के लिए आयात पर लगाया जाता है।

मुख्य बिंदु

व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGR) से विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया, भारतीय सोलर सेल निर्माताओं से पत्र मिलने के बाद संरक्षण शुल्क लागू करने का फैसला लिया गया। 30 जुलाई, 2018 से लेकर 29 जुलाई, 2019 के बीच यह संरक्षण शुल्क लागू होगा, बाद में 30 जुलाई, 2019 के बाद 6 महीने के लिए इसे कम करके 20% किया जायेगा। इसके बाद अगले 6 महीने के लिए इसे कम करके 15% किया जायेगा। यह संरक्षण शुल्क केवल चीन और मलेशिया से आयात किये जाने वाले सोलर सेल पर लगाया गया है, किसी अन्य देश पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

घरेलु उद्योग के समक्ष चुनौतियाँ

भारत के घरेलु सेक्टर में लगभग आधा दर्ज़न सोलर सेल व मोड्यूल निर्माता है, इनकी कुल क्षमता लगभग 3000 मेगावाट है। यह देश की भारी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। आयात पर संरक्षण शुल्क लगाने से भारतीय सोलर उत्पादन की कीमत भी अब विदेशी सोलर उत्पादनों के समान होगी। इसके अलावा भारतीय सोलर निर्माता सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सौर उर्जा प्रोजेक्ट्स को आयात करने की बजाय सौर उपकरण को घरेलु निर्माताओं से प्राप्त करना होगा।

भारत के घरेलु सोलर उपकरण निर्माता सेक्टर द्वारा अपनी क्षमता का पूरा उपयोग का करने का कारण पुरानी टेक्नोलॉजी का उपयोग है। इसके अलावा भारत में उत्पादित किये गए सोलर उपकरण चीनी उपकरणों की तुलना में काफी महंगे हैं। विदेशी आयातित उत्पादों से मुकाबला करने के लिए भारतीय सोलर उपकरण निर्माता सेक्टर को नवीन तकनीक अपनानी होगी तथा कीमत को भी प्रतिस्पर्धात्मक स्तर पर रखना होगा।

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