भारत में सौर उर्जा

केंद्र सरकार ने 2020-21 के बजट में हरित उर्जा उपकरणों के आयात पर 20% शुल्क लगाया  

केंद्र सरकार 2020-21 के बजट में हरित उर्जा उपकरणों के आयात पर 20% शुल्क लगाया। इसका उद्देश्य भारत में हरित उर्जा उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देना है तथा चीन से बने सस्ते व कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के आयात को कम करना है।

सरकार के इस कदम से स्थानीय कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा और भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल मिलेगा।

मुख्य बिंदु

वर्तमान में भारत में उर्जा बाज़ार में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। परन्तु अभी भारतीय बाज़ार में चीनी कंपनियों का दबदबा है, इसका मुख्य कारण चीनी उत्पादों की कम कीमत है। इससे पहले जुलाई, 2018 में भारत ने चीन और मलेशिया की सोलर सेल्स पर शुल्क लगाया था। यह शुल्क जुलाई, 2020 में समाप्त हो रहा है, इसलिए बजट में नये शुल्क लगाये गये हैं।

भारत अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उर्जा उपभोक्ता देश है। भारत की सोलर सेल विनिर्माण क्षमता 3 गीगावाट है। भारत ने 2018-19 में 2.16 अरब डॉलर की सोलर सेल आयात की थीं।

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सरकार ने 2022 तक 40,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना का लक्ष्य रखा

भारत सरकार ने 2022 तक 40,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना का लक्ष्य रखा है, इसमें घर की छतों पर लगाए जाने सोलर पैनल भी शामिल है। दरअसल नवीन व नवीकरणीय उर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने इन सन्दर्भ में राज्यसभा में जवाब दिया है।

मुख्य बिंदु

केन्द्रीय नवीन व नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय द्वारा “ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रोग्राम” का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

भारत में रूफटॉप सोलर इंस्टालेशन : 18 जुलाई, 2019 तक भारत में 1700 मेगावाट के ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सिस्टम स्थापित किये जा चुके हैं। औसतन रूफटॉप सोलर प्लांट से 1.5 मिलियन यूनिट प्रति मेगावाट/वर्ष उर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।

गुजरात मॉडल : रूफटॉप सोलर इंस्टालेशन में क्षेत्रफल के आधार पर गुजरात देशभर में पहले स्थान पर है, गुजरात में 261.97 मेगावाट रूफटॉप सौर उर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। 261.97 मेगावाट में से 183.51 मेगावाट उर्जा का उत्पादन सब्सिडी से प्रदान किये गये उपकरणों से किया जा रहां है। गुजरात के बाद महाराष्ट्र में 198.52 मेगावाट तथा तमिलनाडु में 151.62 मेगावाट सौर उर्जा का उत्पादन रूफटॉप सोलर पैनल से किया जा रहा है।

ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रोग्राम

इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2022 तक रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स से 40,000 मेगावाट उर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करना है।

इस योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में 11,814 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से किया जा रहा है।

दूसरे चरण में 3 किलोवाट के रूफटॉप सिस्टम (रिहायशी रूफटॉप सिस्टम) के लिए केंद्र द्वारा 40% तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि 3 से 10 किलोवाट तक की क्षमता वाले सिस्टम के लिए यह वित्तीय सहायता 20% है।

सोलर रूफटॉप सिस्टम क्या है?

सोलर रूफटॉप सिस्टम घर, दफ्तर, संस्थान अथवा किसी औद्योगिक ईमारत की छत पर लगाया जा सकता है। यह सिस्टम दो प्रकार का होता है :

  • सोलर रूफटॉप सिस्टम जिसमे बैटरी के द्वारा भण्डारण किया जाता है
  • ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटॉप सिस्टम

1.5 मिलियन यूनिट प्रति मेगावाट/वर्ष उर्जा उत्पादन को मध्य नज़र रखते हुए 2022 तक 38 गीगावाट उर्जा का उत्पादन संभव हो सकेगा, इससे प्रतिवर्ष 45.6 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।

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