भूटान

संयुक्त उद्यम जल विद्युत परियोजना के लिए भारत और भूटान के बीच रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किये गये  

29 जून, 2020 को ख खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड और भूटान सरकार के बीच एक रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह रियायत समझौता, भूटानी सरकार के अधिकार क्षेत्र के भीतर खलोंगछु पनबिजली परियोजना को संचालित करने के लिए खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड को अधिकार प्रदान करता है।

भूटान की राजधानी थिम्पू में इस रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किये।

खोलोंगछु पनबिजली परियोजना

यह परियोजना पूर्वी भूटान के त्राश्यांगत्से जिले में खोलोंगचु नदी पर स्थित होगी। इस पनबिजली परियोजना की क्षमता 600 मेगावाट होगी और यह 2025 की दूसरी छमाही तक पूर्ण हो जाएगी।

कार्यान्वयन और पनबिजली परियोजना के विकास के लिए भूटान के ड्रक ग्रीन पावर कारपोरेशन और भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम का गठन किया गया है, इस संयुक्त उद्यम को खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड नाम दिया गया है।

भारत-भूटान द्विपक्षीय जलविद्युत परियोजनाएं

रियायत समझौते पर हस्ताक्षर के साथ, खोलोंगछु पनबिजली परियोजना में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह भारत और भूटान की सरकारों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के तहत 5वीं पनबिजली परियोजना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त, 2019 में मंगदेछु जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया था। मंगदेछु जलविद्युत परियोजना 720 मेगावाट की है। ताला जलविद्युत परियोजना 1020 मेगावाट के साथ भूटान में सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है। ताला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट 2007 से चालू है और भारत द्वारा अनुदान के माध्यम से वित्तपोषित किया गया था।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच समझौता ज्ञापन को मंज़ूरी दी

3 जून, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी। पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग को बेहतर बनाने के लिए देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मुख्य बिंदु

यह समझौता भारत और भूटान के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। साथ ही, यह पारस्परिकता और पारस्परिक लाभों के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और प्रबंधन में मदद करेगा। इस समझौते के अनुसार दोनों देशों ने वायु अपशिष्ट, जलवायु परिवर्तन और रासायनिक प्रबंधन के क्षेत्र में अपने सहयोग का विस्तार करने पर भी सहमति व्यक्त की।

समझौते के बारे में

2013 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संचालित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  और भूटान के  राष्ट्रीय पर्यावरण आयोग के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों देशों ने पर्यावरण के क्षेत्र में अपना सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है।

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