मंडल आयोग

कैबिनेट ने अन्य पिछड़ा वर्ग के उपवर्गीकरण के लिए गठित आयोग के कार्यकाल को बढ़ाया

केन्द्रीय कैबिनेट ने हाल ही में अन्य पिछड़ा वर्ग के उपवर्गीकरण के लिए गठित आयोग के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए मंज़ूरी दे दी है। अब इस आयोग का कार्यकाल 31 मई, 2019 तक बढ़ाया गया है। इस इस आयोग को प्रदान किया जाने वाला चौथा विस्तार है।

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद अक्टूबर 2017 में पांच सदस्यीय आयोग का गठन किया था, इस आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत किया गया था। इस आयोग की अध्यक्ष दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी हैं। इस आयोग की रिपोर्ट द्वारा ओबीसी वर्ग में अत्यंत पिछड़े हुए वर्गों को उप-कोटा प्रदान किया जा सकता है।

इया आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत किया गया है, इसी अनुच्छेद के तहत 1979 में मंडल आयोग की स्थापना भी की गयी थी। मंडल आयोग ने शैक्षणिक व सामाजिक रूप से पिछड़े हुए वर्गों को उच्च शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की अनुशंसा की थी। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी वर्ग में पिछड़े हुए वर्गों के उपवर्गीकरण की बात कही थी। वर्तमान में देश के 11 राज्यों ने राज्य सेवाओं के लिए ओबीसी का उपवर्गीकरण किया है।

यह आयोग ओबीसी वर्ग में शिक्षा तथा सरकारी नौकरी के सम्बन्ध में असमानता का अध्ययन करेगा, इस अध्ययन के पश्चात् ओबीसी वर्ग का उपवर्गीकरण किया जायेगा। यह आयोग इस उपवर्गीकरण के लिए पैमाना, नियम व अन्य पैरामीटर्स तय करेगा।

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2021 जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में पहली बार डाटा एकत्रित किया जायेगा

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना 2021 में अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में डाटा एकत्रित करने की घोषणा की है, स्वतंत्रता के बाद ऐसा पहली बार होगा। मंडल आयोग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दिए जाने के 25 वर्ष बाद इस डाटा को एकत्रित किया जा रहा। यह आरक्षण 1931 की जनसँख्या में एकत्रित किये गए डाटा के आधार पर प्रदान किया गया था।

2021 की जनसँख्या में ओबीसी जनसँख्या के बारे में डाटा एकत्रित करने के निर्णय केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली बैठक में लिया गया। इस डाटा का उपयोग ओबीसी वर्ग के उप-वर्गीकरण के लिए किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

वर्ष 1953 में राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 340 के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन काका केलकर की अध्यक्षता में किया था। इस आयोग का गठन अनुसूचित जाति व जनजाति के अतिरिक्त देश में राष्ट्रीय स्तर पर किसी अन्य पिछड़े वर्ग को चिन्हित करने के लिए किया गया था। इसके बाद 1979 में बी. पी. मंडल की अध्यक्षता में मंडल आयोग का गठन किया गया। मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1257 समुदायों को पिछड़ा हुआ बताया था। इस आयोग ने आरक्षण के कोटा में वृद्धि करने की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों को 1990 में वी. पी. सिंह सरकार ने स्वीकृत किया और इनका क्रियान्वयन किया।

पिछली UPA सरकार ने भी जातीगत सामाजिक व आर्थिक जनगणना की मांग को स्वीकार किया। इस जनगणना में 4,893 करोड़ रुपये का व्यय किया गया था। परन्तु भारत के रजिस्ट्रार ने इस जनगणना में कई गलतियों को चिन्हित किया, जिस कारण इस डाटा को सार्वजनिक नहीं किया जा सका।

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