मंत्री समूह

कार्यस्थल पर यौन शोषण के मामलों के निपटारे के लिए मंत्री समूह का गठन किया गया

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण के मामलों का निपटारा करने के  लिए मंत्रीसमूह का गठन किया। इस मंत्री समूह का गठन केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया गया है। इस मंत्री समूह के अन्य सदस्य सड़क नितिन गडकरी (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण तथा जहाजरानी मंत्री), निर्मला सीताराम (रक्षा मंत्री) तथा मेनका गाँधी (महिला एवं बाल विकास मंत्री) हैं। इसका मुख्य कारण हाल ही में #MeToo के तहत सामने आये यौन शोषण के मामले हैं।

क्या है #MeToo आन्दोलन?

दरअसल #MeToo आन्दोलन के तहत महिलाएं कार्यस्थल इत्यादि पर उनके साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा रही हैं। इसकी शुरुआत अक्टूबर, 2017 में हुई थी, जब यह हैशटैग (#MeToo) इन्टरनेट पर काफी वायरल हुआ था। अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानों ने 2017 में ट्विटर पर महिलाओं को अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया, उसके बाद इस हैशटैग का उपयोग इन्टरनेट पर बड़े पैमाने पर शुरू हुआ और महिलाओं ने अपने साथ हुई इन दुर्व्यवहार की घटनाओं को साझा करना शुरू हुआ। इसके तहत कई बड़े नेताओं, अभिनेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं अपने आवाज़ उठा रही हैं। हाल ही में भारत में भी यह आन्दोलन काफी तीव्रता पकड़ रहा है और अब तक कई बड़े अभिनेताओं, नेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये गये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं आवाज़ उठा रहीं हैं।

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GST परिषद् ने केरल की आपदा सेस की मांग के लिए किया मंत्री समूह का गठन

GST परिषद् ने केरल की आपदा सेस की मांग के लिए किया मंत्री समूह का गठन  किया है, यह मंत्री समूह बाढ़ पुनर्वास के लिए केरल की सेस की मांग पर विचार करेगा। इसका निर्णय नई दिल्ली में GST परिषद् की 30वीं बैठक में लिया गया। मंत्री समूह ने केरल के आपदा कर लगाने के प्रस्ताव पर चर्ची की। इस विशेष कर का उद्देश्य केरल में बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण के कार्य की वित्तीय आवश्यकता को पूरा करना है।

पृष्ठभूमि

अगस्त, 2018 में केरल में असामान्य उच्च मानसून के कारण भीषण बाढ़ का सामना करना है। यह 1924 के बाद केरल में सबसे अधिक भयानक बाढ़ थी। इस बाढ़ से केरल की 1/6  जनसँख्या प्रभावित हुई थी। केरल के सभी 14 जिलों को रेड अलर्ट पर रखा गया था। केंद्र सरकार ने इस बाढ़ को गंभीर आपदा अथवा लेवल 3 की आपदा घोषित किया था। इस बाढ़ के कारण 26 वर्षों में पहली बार इडुक्की बाँध के सभी 5 गेट खोले गये थे। भारी वर्षा के कारण 54 में से 35 बाँध पहली बार खोले गये। इस बाढ़ के कारण केरल के वायनाड तथा इडुक्की जिलों में काफी भूस्खलन ही घटनाएँ हुई।

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