मल्हार

‘वाल्मीकि’ तथा ‘मल्हार’ नामक 2 नई भाषाओं की खोज की गयी

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बोली जाने वाली 2 नई भाषाओं ‘वाल्मीकि’ और ‘मल्हार’ की खोज हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्राध्यापक पंचानन मोहंती ने की है। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम की ‘फाउंडेशन फॉर इन्डेंजर्ड लैंग्वेजेस कॉन्फ्रेंस’ में अपना शोधपत्र भी इस संदर्भ में प्रकाशित किया। खुद को ‘वाल्मीकि’ भाषा बोलने वाले रामायण के रचयिता वाल्मीकि का वंशज बताते हैं।

वाल्मिकी: यह ओडिशा के कोरापुट में और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में बोली जाती है। यह एक अलग भाषा है और यह किसी विशेष भाषा के परिवार से नहीं आती है।

मल्हार: यह भुवनेश्वर, ओडिशा से करीब 165 किमी दूर एक दूरदराज के गांव में बोली जाती है। यह बच्चों सहित 75 लोगो के समुदाय द्वारा बोली जाती है यह भाषा के द्रविड़ परिवार के उत्तर द्रविड़िया उप समूह से संबंधित है।

पृष्ठभूमि

पूरे विश्व के विभिन्न विद्वानों द्वारा भारत को समाजशास्त्रीय और भाषाविद् का स्वर्ग कहा गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने दुर्लभ आदिवासी और छोटी भाषाओं को लिखने का प्रयास किया है, लेकिन कई भाषाएं दुनिया के लिए आज भी अज्ञात हैं।

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