महात्मा गाँधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम

मनरेगा के लिए 170 करोड़ रुपये जारी किये गये

21 मई, 2020 को भारत सरकार ने मनरेगा श्रमिकों को 170 करोड़ रुपये दिए। यह राशि ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के माध्यम से लाभार्थियों को वितरित की गई।

मुख्य बिंदु

विभाग ने 20 अप्रैल, 2020 से मनरेगा (महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत 14,000 से अधिक विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इसमें 8,300 प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास परियोजनाएं और 1,670 जल संरक्षण परियोजनाएं शामिल हैं।जम्मू और कश्मीर में  ही लगभग 5.28 लाख रोज़गार दिवस सृजित किये गये हैं।

महत्व

COVID-19 संकट के कारण प्रवासियों के अपने घर में वापस लौटने के बाद देश में ग्रामीण आबादी बढ़ गई और इससे ग्रामीण बेरोजगारी भी बढ़ी है। भारत सरकार ने इस योजना के तहत मजदूरी को 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 को लागू करने के लिए मनरेगा के तहत स्वच्छता कर्मचारियों को शामिल किया गया था। वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लागू करने के लिए मनरेगा के तहत कार्यरत है।

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मनरेगा योजना में फंड्स की कमी

मनरेगा (महात्मा गाँधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम) योजना ने हाल ही में वित्तीय स्टेटमेंट जारी की। इस स्टेट के अनुसार कुल आबंटित राशि में से 96% धनराशी का व्यय किया जा चुका है। अगले दो महीनों के लिए इस योजना के लिए केवल 2,500 करोड़ रुपये बचे हैं।

मुख्य बिंदु

इस वित्तिय स्टेटमेंट के अनुसार 15 राज्यों में आबंटित धनराशी समाप्त हो गयी है। राजस्थान में सबसे अधिक नकारात्मक बैलेंस 620 करोड़ रुपये है। राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश का बैलेंस -323 करोड़ रुपये है। इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये आबंटित किये गये थे, यह धनराशी पिछले कुछ वर्षों से कम है।

वर्तमान स्थिति

राजस्थान में 1,950 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इस योजना के तहत 15 दिनों के भीतर 75% मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए। वर्तमान में फंड्स की कमी के कारण भुगतान में देरी हो रही है।

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