महात्मा गांधी

पर्यटन मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है पर्यटन पर्व 2019 का आयोजन

केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय देश भर में 2 से 13 अक्टूबर, 2019 के दौरान पर्यटन पर्व 2019 का आयोजन कर रहा है। इसके द्वारा देशवासियों को अपने देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया जायेगा।

पर्यटन पर्व

दिल्ली में पर्यटन पर्व का आयोजन 2-6 अक्टूबर, 2019 के दौरान राजपथ लॉन में में किया जा रहा है। पर्यटन पर्व 2019 का संस्करण महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के प्रति समर्पित है। पर्यटन पर्व के द्वारा ‘देखो अपना देश’ के सन्देश को प्रचारित किया जायेगा। इसका उद्देश्य देशवासियों को अपने देश के विभिन्न क्षेत्रों को देखने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ की जाती हैं, इसमें सोशल मीडिया में प्रचार, फोटोग्राफी कांटेस्ट, पर्यटन सम्बन्धी क्विज, चर्चा इत्यादि शामिल है।

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आज मनाई जा रही है महात्मा गाँधी की 150वीं वर्षगाँठ

भारत में 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष महात्मा गाँधी की 150वीं जन्म वर्षगाँठ है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अन्य गणमान्य नेताओं ने राजघाट में गांधीजी को श्रद्धांजली अर्पित की।

मोहनदास करमचंद गाँधी

मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को ब्रिटिश भारत की बॉम्बे प्रेसीडेंसी के पोरबंदर में हुआ था। उनकी हत्या 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गयी थी।

स्वतंत्रता आन्दोलन में उनके निस्वार्थ योगदान के लिए गांधीजी को “बापू” भी कहा जाता है। उन्हें अनाधिकारिक रूप से “राष्ट्रपिता” भी कहा जाता है। उन्होंने लन्दन में कानून की पढाई की थी, तत्पश्चात वे भारत लौटे, बाद में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय फर्म में कार्य किया।

गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। भारत में उन्होंने कई सामाजिक कार्यों तथा स्वराज प्राप्त करने के लिए कार्य किया। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध के द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह तथा असहयोग आन्दोलन का उपयोग किया। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध गांधीजी के विरोध में असहयोग आन्दोलन और दांडी यात्रा प्रमुख है, इससे ब्रिटिश सरकार को काफी धक्का लगा।

गांधीजी ने अपने जीवन को सरलता और सदाचार से जीया और वे पारंपरिक भारतीय परिधान धोती और शाल ही पहनते थे। राजनीतिक विरोध प्रकट करने तथा स्वयं के शुद्धिकरण लिए वे अनशन करते थे। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

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