महिला सशक्तिकरण

राज्यसभा ने पारित किया ट्रिपल तलाक बिल

हाल ही में राज्यसभा ने ट्रिपल तलाक विधेयक को पारित कर दिया है, इस बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 84 वोट पड़े। अब इस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंज़ूरी के लिए भेजा जायेगा, राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद इसके सरकार द्वारा अधिसूचित कर दिया जायेगा। यह विधेयक फरवरी में लागू किये गये अध्यादेश का स्थान लेगा।

मुख्य बिंदु

ट्रिपल तलाक के लिए आरोपी पुरुष को तीन साल कारावास की सजा दी जा सकती है। इसका दुरूपयोग रोकने के लिए जमानत की व्यवस्था भी है। ट्रिपल तलाक का मामला तभी संज्ञान लेने योग्य होगा जब पीड़ित अथवा उसके सगे-सम्बन्धियों द्वारा FIR दर्ज करवाई जायेगी। ऐसे मामले में केवल पीड़ित के आग्रह पर ही समझौता किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पीड़ित अपने अल्पव्यस्क बच्चों की कस्टडी भी ले सकती है और इसके लिए उसे गुज़ारा भत्ता भी देय होगा।

पृष्ठभूमि

अगस्त, 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक की इस्लामिक प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया था। इस प्रथम के तहत मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी को केवल तीन बार तलाक शब्द बोलकर तलाक दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक को धार्मिक परंपरा के अभिन्न हिस्सा होने की दलील को भी अस्वीकार किया। इस पर कानून बनाने के लिए सरकार ने मुस्लिम महिला (विवाह सम्बन्धी अधिकारों की सुरक्षा) बिल, 2017 लोक सभा में दिसम्बर, 2017 में पारित किया था। परन्तु विपक्षी दलों से सहमती न बनने यह बिल राज्य सभी में अभी लटका हुआ था।

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गोवा सरकार ने महिलाओं के रात्रि शिफ्ट में कार्य करने के लिए फैक्ट्री अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी

गोवा सरकार ने महिलाओं के रात्रि शिफ्ट में कार्य करने के लिए 1948 के फैक्ट्री अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी। इसके पश्चात महिलाएं गोवा में रात्री शिफ्ट (शाम के 7 बजे से सुबह के 6 बजे तक) उद्योग में कार्य कर सकती है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में गोवा सरकार का महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु

राज्य कैबिनेट द्वारा संशोधन बिल को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इस बिल को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे महिलाओं के अधिक रोजगार के अवसर मिल सकेंगे और उन्हें अपने करियर में आगे बढने का मौका मिलेगा। यह कदम कार्यस्थल में समानता की दिशा में काफी उपयोगी सिद्ध होगा।

1948 का फैक्ट्री अधिनियम

इसका प्रशासन केन्द्रीय श्रम व रोज़गार मंत्रालय द्वारा फैक्ट्री परामर्श सेवा व श्रम संस्थान महानिदेशालय द्वारा किया जाता है। फैक्ट्री परामर्श सेवा व श्रम संस्थान महानिदेशालय द्वारा केंद्र तथा राज्यों को फैक्ट्री अधिनियम के प्रशासन के सम्बन्ध में परामर्श देता है तथा राज्यों में फैक्ट्री निरीक्षण सेवा का समन्वय करता है।

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