माता वैष्णों देवी मंदिर

माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल को ‘बेस्ट स्वच्छ आइकोनिक प्लेस’ चुना गया

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल को देश में ‘बेस्ट स्वच्छ आइकोनिक प्लेस’ चुना गया है। राष्ट्रप्रति रामनाथ कोविंद श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को ‘स्वच्छ महोत्सव’ के दौरान सम्मानित करेंगे। ‘स्वच्छ महोत्सव’ का आयोजन केन्द्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय द्वारा 6 सितम्बर, 2019 को किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छ आइकोनिक प्लेसेस’ की रैंकिंग जारी की गयी।   इससे पहले 2017 में पेयजल तथा स्वच्छता मंत्रालय ने माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल को सम्मानित किया था, इस वर्ष माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल दूसरे स्थान पर रहा था। 2018 में इंडिया टुडे समूह ने  माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल को सबसे स्वच्छ धार्मिक स्थल घोषित किया था।

माता वैष्णों देवी मंदिर

माता वैष्णों देवी मंदिर जम्मू क्षेत्र के रियासी जिले में त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है । यह मंदिर माता आदि शक्ति वैष्णों देवी को समर्पित है। गौरतलब है कि 2019 में इस मंदिर में 86 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए जा चुके हैं।

‘बेस्ट स्वच्छ आइकोनिक प्लेस’ की दौड़ में माता वैष्णों देवी तीर्थस्थल के अतिरिक्त निम्नलिखित स्थान भी शामिल थे :

चर्च एंड कान्वेंट ऑफ़ सैंट फ्रांसिस ऑफ़ असीसी (गोवा), छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (महाराष्ट्र), तिरुपति मंदिर (आंध्र प्रदेश), ताज महल (उत्तर प्रदेश), स्वर्ण मंदिर (पंजाब), कामख्या मंदिर (असम), जगन्नाथ पुरी (ओडिशा), अजमेर शरीफ दरगाह (राजस्थान) इत्यादि।

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वन्दे भारत एक्सप्रेस ने नई दिल्ली से कटरा के बीच ट्रायल रन पूरा किया

भारतीय रेलवे के उत्तरी रेलवे जोन ने हाल ही में वन्दे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ट्रायल नई दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर के एक कस्बे कटरा के बीच किया गया। वन्दे भारत ने नई दिल्ली और कटरा के बीच की दूरी को मात्र 8 घंटे में तय किया। गौरतलब है कि यह ट्रेन माता वैष्णो देवी के मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। इस ट्रेन को अगस्त से नई दिल्ली और कटरा के बीच चलाया जा सकता है।

वन्दे भारत एक्सप्रेस

ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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