मानव संसाधन विकास मंत्रालय

कर्नाटक सरकार ने बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए ज़रूरी कदम उठाये

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश के बाद कर्नाटक सरकार ने स्कूलों के लिए कुछ एक आवश्यक कदम तथा दिशानिर्देश जारी किये हैं। सरकार ने बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं। कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के लिए सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार स्कूल बैग का भार छात्र के वज़न के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • कक्षा 1 तथा 2 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 2 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए, कक्षा 3 से 5 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 2 से 3 किलोग्राम के बीच होना चाहिए।
  • कक्षा के साथ स्कूल बैग के भार में थोड़ी-थोड़ी वृद्धि होती है। कक्षा 9 तथा 10 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 4-5 किलोग्राम हो सकता है।
  • कक्षा 1 तथा  2 के छात्रों को किसी प्रकार का होमवर्क नहीं दिया जाना चाहिए। स्कूल को शुरू से समय सारणी निर्मित करनी चाहिए, जिससे स्कूल ले जाने वाली पुस्तकों की संख्या सीमित हो सके। समस्त क्लासवर्क स्कूल में ही रखा जाना चाहिए।
  • स्कूलों को कुछ खाली जगह की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है जहाँ पर छात्र अपनी किताबें तथा नोटबुक्स रख सकते हैं।
  • स्कूलों को बच्चों के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था करनी होगी ताकि बच्चों को घर से पानी की बोतल न ले जानी पड़े।

हर महीने का तीसरा  शनिवार “नो स्कूल बैग डे” होगा, इस दिन छात्र स्कूल को बस्ता नहीं ले जायेंगे। इस दिन छात्रों को बिना पुस्तकों के किसी अन्य गतिविधि में संलग्न करना चाहिए। इस दिन बच्चों को सामान्य ज्ञान, कला, खेल कूद, नृत्य तथा परिचर्चा जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए।

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सरकार ने लांच किया ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड

कक्षाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड लांच किया है। इसे 1987 में लांच किये गये ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड की तर्ज पर लांच किया गया है, ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड को स्कूलों में आधारभूत सुविधाएँ प्रदान के लिए लांच किया गया था।

मुख्य बिंदु

ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड का क्रियान्वयन इसी शैक्षणिक वर्ष से किया जायेगा, इस कार्यक्रम के द्वारा स्कूलों में बेहतर डिजिटल शिक्षा प्रदान की जायेगी। इस कार्यक्रम के तहत 2022 तक 9वीं, 10वीं तथा 11वीं कक्षाओं के 7 लाख क्लासरूम्स तथा महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय के 2 लाख क्लासरूम्स में डिजिटल बोर्ड स्थापित किये जायेंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा सीखने व सिखाने में नए अवसर उत्पन्न होंगे। इससे छात्रों में भी अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न होगी। डिजिटल अध्यापन सामग्री से देश की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकते हैं।

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