मानव संसाधन विकास मंत्रालय

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने लांच की समग्र शिक्षा जल सुरक्षा पहल

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में समग्र शिक्षा-जल सुरक्षा पहल लांच की, इसका उद्देश्य देश भर के स्कूली छात्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। इसका उद्देश्य जल शक्ति अभियान के तहत “जल संचय” अभियान को बढ़ावा देना है।

समग्र शिक्षा जल सुरक्षा पहल

यह एक समयबद्ध अभियान है, इसका उद्देश्य स्कूली छात्रों के द्वारा जल संरक्षण सम्बंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस अभियान के तहत छात्रों को जल संचय के महत्व के बारे में अवगत करवाया जायेगा।

क्रियान्वयन एजेंसी : स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग (मानव संसाधन विकास मंत्रालय)

पांच मुख्य उद्देश्य

  • जल संरक्षण के बारे में स्कूली छात्रों को जागरूक करना।
  • छात्रों को जल की कमी की समस्या के बारे में अवगत करवाना।
  • छात्रों को जल के प्राकृतिक स्त्रोतों की सुरक्षा करने के लिए प्रेरित करना।
  • प्रत्येक छात्र को प्रतिदिन कम से कम एक लीटर पानी बचाने के लिए प्रेरित करना।
  • छात्रों को घर तथा स्कूल में पानी की कम से कम बर्बादी सुनिश्चित करना।

लक्ष्य

  • एक छात्र – प्रतिदिन एक लीटर जल बचाना
  • एक छात्र – एक वर्ष में 365 लीटर जल बचाना
  • एक छात्र – 10 वर्ष में 3650 लीटर जल बचाना

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कर्नाटक सरकार ने बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए ज़रूरी कदम उठाये

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश के बाद कर्नाटक सरकार ने स्कूलों के लिए कुछ एक आवश्यक कदम तथा दिशानिर्देश जारी किये हैं। सरकार ने बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं। कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के लिए सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार स्कूल बैग का भार छात्र के वज़न के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • कक्षा 1 तथा 2 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 2 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए, कक्षा 3 से 5 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 2 से 3 किलोग्राम के बीच होना चाहिए।
  • कक्षा के साथ स्कूल बैग के भार में थोड़ी-थोड़ी वृद्धि होती है। कक्षा 9 तथा 10 के छात्रों के स्कूल बैग का भार 4-5 किलोग्राम हो सकता है।
  • कक्षा 1 तथा  2 के छात्रों को किसी प्रकार का होमवर्क नहीं दिया जाना चाहिए। स्कूल को शुरू से समय सारणी निर्मित करनी चाहिए, जिससे स्कूल ले जाने वाली पुस्तकों की संख्या सीमित हो सके। समस्त क्लासवर्क स्कूल में ही रखा जाना चाहिए।
  • स्कूलों को कुछ खाली जगह की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है जहाँ पर छात्र अपनी किताबें तथा नोटबुक्स रख सकते हैं।
  • स्कूलों को बच्चों के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था करनी होगी ताकि बच्चों को घर से पानी की बोतल न ले जानी पड़े।

हर महीने का तीसरा  शनिवार “नो स्कूल बैग डे” होगा, इस दिन छात्र स्कूल को बस्ता नहीं ले जायेंगे। इस दिन छात्रों को बिना पुस्तकों के किसी अन्य गतिविधि में संलग्न करना चाहिए। इस दिन बच्चों को सामान्य ज्ञान, कला, खेल कूद, नृत्य तथा परिचर्चा जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए।

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