मिजोरम

ब्रू लोगों के पुनर्वास के लिए समझौता किया गया

ब्रू विस्थापितों की समस्या का समाधान करने के लिए त्रिपुरा और मिजोरम के साथ मिलकर एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं, इस नए समझौते के अंतर्गत त्रिपुरा में ही ब्रू विस्थापितों को भूमि दी जायेगी और उन्हें त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार 600 करोड़ रुपये मंज़ूर किये हैं।

मुख्य बिंदु

इस समझौते में 5,407 ब्रू परिवारों (32,876  लोग) को शामिल किया गया है, यह त्रिपुरा में स्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इन ब्रू परिवारों को 4-4 लाख रुपये दिए जायेंगे, यह राशी परिवार के मुखिया के खाते में फिक्स्ड डिपाजिट की जाएगी। इन परिवारों के घर के निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये तीन किश्तों में दिए जायेंगे। इसके अलावा इन परिवारों को दो वर्ष निशुल्क राशन दिया जायेगा तथा प्रतिमाह 5000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

पृष्ठभूमि

ब्रू (रियांग) जनजाति उत्तर-पूर्व के कुछ राज्य में निवास करती है। मिजोरम में यह जनजाति मामित और कोलासिब जिले में केन्द्रित है। 1997 में मिज़ो और ब्रू जनजातियों के बीच हिंसा के कारण ब्रू जनजाति के लोगों को मिजोरम छोड़कर त्रिपुरा में बसना पड़ा था। मिज़ो छात्र संघ द्वारा ब्रू लोगो को मतदाता सूची से हटाने की मांग कर रहा था, उनका मत था कि ब्रू मिजोरम के मूल निवासी नहीं हैं। इस हिंसा के बाद एक सशस्त्र ब्रू संगठन ‘ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ की स्थापना हुई थी। इसके अलावा एक राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल फ्रंट की स्थापना की गयी थी। त्रिपुरा से मिजोरम में ब्रू के पुनर्वास का पहला चरण नवम्बर, 2010 में शुरू हुआ था, जब 1,622 परिवारों के 8,573 को मिजोरम में बसाया गया था।

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उत्तराखंड में किया गया प्रथम हिमालयी कॉन्क्लेव का आयोजन

उत्तराखंड में हिमालयी राज्यों के प्रथम सम्मेलन का आयोजन मसूरी में 28 जुलाई को किया गया, इस सम्मेलन का मुख्य फोकस सतत विकास था। इस सम्मेलन में हिमालयी राज्यों के प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की गयी। इस सम्मेलन में 15वें वित्त आयोग में हिमालयी क्षेत्रों की प्रमुखताओं पर भी चर्चा की गयी। इस कॉन्क्लेव की मुख्य अतिथि केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण थीं।

मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश,मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम तथा नागालैंड के मुख्यमंत्री तथा अन्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में ग्लोबल वार्मिंग के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना तथा जल संरक्षण की विधियों इत्यादि पर चर्चा की गयी। इन राज्यों ने पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए केंद्र से ग्रीन बोनस की मांग भी की है। इन राज्यों ने केंद्र से हिमालयी क्षेत्र के लिए एक अलग मंत्रालय की स्थापना किये जाने की मांग की है। इस कॉन्क्लेव का समापन “मसूरी रेजोल्यूशन 2019” को स्वीकृत किये जाने के साथ हुआ।

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