मिसाइल

DRDO अपने 450 पेटेंट तक निशुल्क पहुँच उपलब्ध करवाएगा

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने अपने 450 पेटेंट्स तक निशुल्क पहुँच प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य घरेलु उद्योगों को बढ़ावा देना है। DRDO के इस निर्णय से सामरिक क्षेत्र में कार्यरत्त स्टार्टअप्स को काफी बढ़ावा मिलेगा।

DRDO इन पेटेंट्स के उपयोग के लिए किसी प्रकार की रॉयल्टी फीस अथवा लाइसेंसिंग फीस नहीं वसूलेगा। इन पेटेंट्स में जीव विज्ञान, मिसाइल, नेवल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार, कॉम्बैट इंजीनियरिंग तथा एरोनॉटिक्स इत्यादि से सम्बंधित टेक्नोलॉजी शामिल है।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

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अग्नि-5 मिसाइल का छठा सफल परीक्षण

भारत ने 3 जून 2018 को स्वदेशी विकसित अग्नि-5 मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. इस मिसाइल का प्रक्षेपण ओडिशा तट के डॉ अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया. डॉ अब्दुल कलाम द्वीप पर एकीकृत टेस्ट रेंज के मोबाइल लॉन्चर की मदद से इसे लॉन्च किया गया है और यह एक सतह से सतह प्रकार की मिसाइल है. अग्नि-5 का यह छठा सफल परीक्षण था.

मुख्य तथ्य

अग्नि 5 बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा तैयार की गयी है. यह अपनी श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल है. यह एक बेहद शक्तिशाली और लंबी दूरी की मिसाइल है जो नैविगेशन और दिशा-निर्देशन, वॉरहेड और इंजिन संबंधी नई तकनीकों से परिपूर्ण है. 17 मीटर लंबी, दो मीटर चौड़ी यह अग्नि -5 मिसाइल 5000 किमी की मारक क्षमता रखती है. इस मिसाइल का वजन लगभग 20 टन है और यह 1.5 टन तक का परमाणु हथियार भी ले जा सकती है. तेज गति वाली इस अग्नि-5 मिसाइल का उपयोग बहुत ही आसान है, युद्ध के समय इसका उपयोग किसी भी प्लेटफॉर्म से किया जा सकता है. क्योंकि यह मिसाइल लंबी मारक क्षमता के साथ साथ परमाणु हथियारों को भी ले जाने में सक्षम है जो सेना की शक्ति में वृद्धि को सुनिश्चित करता है.

प्रष्ठ भूमि

अग्नि-5 की श्रंखला का पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को, दूसरा परीक्षण – 15 सितंबर 2013 को, तीसरा परीक्षण – 31 जनवरी 2015 को, चौथा परीक्षण – 26 दिसंबर 2016 को, तथा पांचवा परीक्षण – 18 जनवरी 2018 को हुआ जिसमें सारे ही परीक्षण सफल रहे और अब यह अग्नि 5 का छठा सफल परीक्षण था.

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