मेक इन इं‍डिया

डीपीआईआईटी ने मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक खरीद आदेश को संशोधित किया

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने हाल ही में मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक खरीद आदेश को संशोधित किया है।

मुख्य बिंदु

आदेश के अनुसार, DPIIT ने वर्ष 2020-21 के लिए स्थानीय सामग्री की न्यूनतम 60% खरीद, वर्ष 2021-23 के लिए 70% और वर्ष 2023-25 ​​के लिए 80% निर्धारित की है। यह रसायन और पेट्रोकेमिकल पर लागू होता है। DPIIT ने 55 रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स की पहचान की है जो 5 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए बोली लगाने के योग्य हैं।

महत्व

इस कदम से आत्म निर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत, भारत सरकार ने 20,000 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया।

आवंटित किए गए फंड का उपयोग एमएसएमई, कृषि, मनरेगा, मत्स्य पालन, स्ट्रीट वेंडर, डेयरी क्षेत्र आदि में किया जा रहा है। यह फंड देश की जीडीपी का 10% है। 10% योगदान संयुक्त राष्ट्र में कई देशों और सदस्यों की बैठक द्वारा तय किया गया था।

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मेक इन इंडिया: रक्षा मंत्रालय आयुध निर्माणी बोर्ड को 156 BMP इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल का आर्डर दिया

2 जून, 2020 को रक्षा मंत्रालय ने ओएफबी (आयुध निर्माणी बोर्ड) 156 BMP इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल का आर्डर दिया। यह मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

मुख्य बिंदु

तेलंगाना के मेडक में स्थित आयुध कारखाने द्वारा 1,094 करोड़ रुपये की लागत से आईसीवी का निर्माण किया जायेगा। ICV का निर्माण 2023 तक पूरा हो जाएगा। इन ICV के निर्माण से मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री बटालियनों की मौजूदा कमी को कम किया जाएगा और सेना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मेक इन इंडिया

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2014 में मेक इन इंडिया पहल शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार है  :

  • स्वदेशी रूप से उत्पादित वस्तुओं को बढ़ाना
  • नए औद्योगीकरण के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करना
  • चीन को पछाड़कर भारत में पहले से मौजूद उद्योगों को विकसित करना
  • 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त नौकरियों का सृजन करना
  • निर्यात-आधारित विकास को बढ़ावा देना
  • 2022 तक भारत के GDP में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 16% से बढ़ाकर 25% करना

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