युद्ध अभ्यास

‘युद्ध अभ्यास 2019’ संपन्न हुआ

भारत और अमेरिका के बीच “युद्ध अभ्यास 2019” नामक युद्ध अभ्यास का आयोजन अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में जॉइंट बेस लेविस मैक्कोर्ड  में किया गया। यह युद्ध अभ्यास 5 सितम्बर से 18 सितम्बर के बीच किया गया। यह ‘युद्ध अभ्यास’ का 15वां संस्करण है, इसकी शुरुआत 2004 में अमेरिकी सेना के प्रशांत पार्टनरशिप कार्यक्रम के तहत हुई थी।

युद्ध अभ्यास 2019

इस अभ्यास का उद्देशय दोनों देशों की सेनाओं के बीच आतंक विरोधी ऑपरेशन में दक्षता को वृद्धि करना है। इस बारे में युद्ध अभ्यास के दायरा काफी विस्तृत है। इस बार “युद्ध अभ्यास” में बटालियन स्तरीय प्रशिक्षण तथा डिवीज़न स्तरीय कमांड पोस्ट अभ्यास किया गया।

पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग में काफी वृद्धि हुई है। सितम्बर में दोनों देशों ने COMCASA नामक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, इसके बाद भारतीय सेनाओं को अमेरिका से मिलिट्री-ग्रेड संचार उपकरण प्राप्त हो सकेंगे।

2019 में भारत और अमेरिका ने दोनों देशों के बीच सबसे बड़े त्रि-सेवा युद्ध सेवा अभ्यास के आयोजन पर सहमती प्रकट की है। यह केवल दूसरा ऐसा अवसर होगा जब किसी अन्य देश के साथ युद्ध अभ्यास में भारत की थल सेना, जल सेना तथा वायुसेना एक साथ हिस्सा लेंगी। इससे पहले 2017 में रूस के साथ व्लादिवोस्टोक में युद्ध अभ्यास में भारत की तीनों सेनाओं ने हिस्सा लिया था।

जुलाई, 2018 में अमेरिका ने भारत को STA-1 (Strategic Trade Authorisation-1) देश का स्टेटस प्रदान करने की घोषणा की थी, भारत यह स्टेटस प्राप्त करने वाला दक्षिण एशिया का पहला देश है। यह स्टेटस दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों को प्राप्त है। इस स्टेटस से भारत को अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा  टेक्नोलॉजी प्राप्त करने में सरलता होगी।

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अमेरिका में किया जायेगा ‘युद्ध अभ्यास 2019’ का आयोजन

भारत और अमेरिका के बीच “युद्ध अभ्यास 2019” नामक युद्ध अभ्यास अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में जॉइंट बेस लेविस मैक्कोर्ड  में किया जायेगा। यह युद्ध अभ्यास 5 सितम्बर से 18 सितम्बर के बीच किया जायेगा। यह ‘युद्ध अभ्यास’ का 15वां संस्करण है, इसकी शुरुआत 2004 में अमेरिकी सेना के प्रशांत पार्टनरशिप कार्यक्रम के तहत हुई थी।

युद्ध अभ्यास 2019

इस अभ्यास का उद्देशय दोनों देशों की सेनाओं के बीच आतंक विरोधी ऑपरेशन में दक्षता को वृद्धि करना है। इस बारे में युद्ध अभ्यास के दायरा काफी विस्तृत है। इस बार “युद्ध अभ्यास” में बटालियन स्तरीय प्रशिक्षण तथा डिवीज़न स्तरीय कमांड पोस्ट अभ्यास किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग में काफी वृद्धि हुई है। सितम्बर में दोनों देशों ने COMCASA नामक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, इसके बाद भारतीय सेनाओं को अमेरिका से मिलिट्री-ग्रेड संचार उपकरण प्राप्त हो सकेंगे।

2019 में भारत और अमेरिका ने दोनों देशों के बीच सबसे बड़े त्रि-सेवा युद्ध सेवा अभ्यास के आयोजन पर सहमती प्रकट की है। यह केवल दूसरा ऐसा अवसर होगा जब किसी अन्य देश के साथ युद्ध अभ्यास में भारत की थल सेना, जल सेना तथा वायुसेना एक साथ हिस्सा लेंगी। इससे पहले 2017 में रूस के साथ व्लादिवोस्टोक में युद्ध अभ्यास में भारत की तीनों सेनाओं ने हिस्सा लिया था।

जुलाई, 2018 में अमेरिका ने भारत को STA-1 (Strategic Trade Authorisation-1) देश का स्टेटस प्रदान करने की घोषणा की थी, भारत यह स्टेटस प्राप्त करने वाला दक्षिण एशिया का पहला देश है। यह स्टेटस दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों को प्राप्त है। इस स्टेटस से भारत को अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा  टेक्नोलॉजी प्राप्त करने में सरलता होगी।

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