यूनानी

आयुष तथा रक्षा मंत्रालय ने पारंपरिक औषधियां प्रदान करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये

हाल ही में केन्द्रीय आयुष मंत्रालय तथा केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने  सशस्त्र बलों के अस्पतालों तथा डिस्पेंसरी में आयुष औषधियां उपलब्ध करवाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। दिल्ली कैंटोनमेंट में बेस हॉस्पिटल में आयुर्वेद पेलियेटिव केयर यूनिट के उद्घाटन के अवसर पर इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।

इसा समझौते के तहत आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल, एयर फ़ोर्स हॉस्पिटल, हिंडन (गाज़ियाबाद) तथा पांच एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) पोलीक्लिनिक (दिल्ली-एनसीआर) के पेलियेटिव केयर यूनिट में आयुर्वेद यूनिट्स की स्थापना की जायेगी।

महत्व

भारतीय सैनिक सियाचिन के ग्लेशियर से लेकर थार के मरुस्थल तक विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं, इसका प्रभाव न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योग और आयुर्वेद की भूमिका महत्वपूर्ण हैं।

आयुष

भारत में लगभग 5000 वर्षों से पारंपरिक औषधि व चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जा रहा है। आयुष कई पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से मिलकर बना है, इसमें आयुर्वेद, योग व नेचुरोपैथी, यूनानी और होमियोपैथी शामिल हैं।

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कैबिनेट ने भारतीय औषधि प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग बिल, 2018 को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय कैबिनेट ने हाल ही में भारतीय औषधि प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग बिल, 2018 को मंज़ूरी दे दी है। यह बिल केन्द्रीय भारतीय औषधि परिषद् का स्थान लेगा।

बिल की मुख्य विशेषताएं

  • इस बिल में चार स्वायत्त बोर्ड के साथ राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की व्यवस्था की गयी है।
  • आयुर्वेद शिक्षा की देखभाल का कार्य आयुर्वेद बोर्ड द्वारा किया जायेगा।
  • यूनानी, सिद्ध तथा सोवारिग्पा की शिक्षा की देखभाल यूनानी, सिद्ध तथा सोवारिग्पा बोर्ड द्वारा की जाएगी।
  • भारतीय औषधि प्रणाली की शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों को अनुमति देने तथा उनके मूल्यांकन का कार्य मूल्यांकन व रेटिंग बोर्ड द्वारा किया जायेगा।
  • भारतीय औषधि प्रणाली के प्रैक्टिशनर का नैतिक व पंजीकरण बोर्ड भारतीय औषधि प्रणाली  से सम्बंधित नैतिक मामलों के लिए नेशनल रजिस्टर का प्रबंधन करेगा।
  • सभी स्नातकों को प्रैक्टिस के लिए एक कॉमन एंट्रेंस व एग्जिट टेस्ट पास करना होगा, इसके बाद ही प्रैक्टिसिंग लाइसेंस प्रदान किया जायेगा।
  • इस बिल में अध्यापकों के लिए “अध्यापक योग्यता परीक्षा” का प्रावधान रखा गया है, इसके द्वारा नियुक्ति व पदोन्नति से पहले अध्यापकों के स्तर का मूल्यांकन किया जा सकेगा।

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