रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन

DRDO ने COVID-19 से लड़ने में मदद करने के लिए N99 मास्क, वेंटिलेटर और हैंड सैनिटाइज़र विकसित किये

DRDO (रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन) ने COVID-19  के प्रसार को रोकने के लिए चार वस्तुओं का विकास किया है। DRDO ने हैंड सैनिटाइज़र, वेंटिलेटर, N99 मास्क और बॉडी सूट विकसित किए हैं।

हैंड सैनिटाइज़र

भारतीय सशस्त्र बलों, सुरक्षा कोर और चिकित्सा कोर के लिए लगभग 4,000 लीटर हैंड सैनिटाइज़र तैयार किया गया है। DRDO ने रक्षा मंत्रालय के लिए 1,500 लीटर और संसद के लिए 300 लीटर लीटर हैंड सैनिटाइज़र तैयार किया है। DRDO प्रति दिन 20,000 से 30,000 लीटर हैंड सैनिटाइज़र निर्मित करेगा। इस सैनिटाइज़र की लागत 120 रुपये प्रति लीटर से कम है।

N99 मास्क

DRDO ने 5-लेयर वाला N99 मास्क विकसित किया है। पाँच परतों में से 2 परतें नैनो जाली से बनी होती हैं। DRDO प्रतिदिन 10,000 ऐसे मास्क निर्मित करेगा। एक मास्क की कीमत 70 रुपये है।

वेंटिलेटर

डीआरडीओ के तहत सोसायटी फॉर बायोमेडिकल टेक्नोलॉजी कार्यक्रम को वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए संशोधित किया गया है। इसके तहत अब वेंटिलेटर के निर्माण का कार्य किया जाएगा। पहले महीने में लगभग 5,000 वेंटिलेटर का उत्पादन जायेगा। बाद में धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 10,000 तक कर दिया जायेगा।

बॉडी सूट

डीआरडीओ द्वारा पहले रेडियोलॉजिकल आपात स्थिति के लिए मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए  बॉडी सूट विकसित किया गया था। अब इसे फुल बॉडी सूट में बदल दिया गया है जो संदूषण को रोकने में मदद करेगा।

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DRDO ने गणतंत्र दिवस परेड में A-SAT हथियार प्रणाली को प्रदर्शित किया

26 जनवरी, 2020 को गणतंत्र दिवस परेड में रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) A-SAT (Anti-Satellite Weapon System) हथियार प्रणाली को प्रदर्शित किया। भारत विश्व के चुनिन्दा देशों में से एक है जिनके पास इस किस्म की टेक्नोलॉजी है, भारत के अलावा यह टेक्नोलॉजी केवल अमेरिका, चीन और रूस के पास है।

मिशन शक्ति

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 27 मार्च, 2019 को संबोधन में प्रकट किया था कि भारत ने अपनी पहली एंटी-सैटेलाइट मिसाइल ने अन्तरिक्ष में उपग्रह को सफलतापूर्वक नष्ट किया  है।

  • इस मिशन को “मिशन शक्ति” नाम दिया गया था। इस मिशन में मिसाइल ने पृथ्वी की निम्न कक्षा में सैटेलाइट को नष्ट किया गया।
  • यह कार्य लांच के केवल तीन मिनट बाद ही पूरा कर लिया गया। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
  • इस मिशन का नेतृत्व रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन द्वारा किया गया।
  • टारगेट सैटेलाइट 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा था।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का यह मिशन किसी दूसरे देश के विरुद्ध नहीं है। इस मिशन को पूरा करने के लिए किसी अंतर्राष्ट्रीय कानून अथवा संधि का उल्लंघन नहीं किया गया है।
  • यह बेहद जटिल मिशन था, गौरतलब है कि मिसाइल ने तीव्र गति तथा उत्तम सटीकता से अपने लक्ष्य को ध्वस्त किया।
  • भारत अन्तरिक्ष में सैटलाइट को मार गिराने वाले विश्व का चौथा देश है, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संधि

भारत ने 1976 बाह्य अन्तरिक्ष नामक अंतर्राष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किये हैं, इस संधि के तहत बाह्य अन्तरिक्ष में बड़े स्तर के  विनाशकारी हथियारों पर प्रतिबन्ध है।

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