रक्षा निर्माण

प्रधानमंत्री 5 DRDO प्रयोगशालाएं देश को समर्पित करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2 जनवरी, 2020 को रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन की पांच प्रयोगशालाएं देश को समर्पित करेंगे। इससे शोध कार्य कार्य को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य बिंदु

यह प्रयोगशालाएं देश के युवा वैज्ञानिकों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होंगी। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान DRDO प्रधानमंत्री मोदी को अपने कुछ एक नवोन्मेषी उत्पाद भी प्रदर्शित करेगा। इसके लिए एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टाब्लिश्मेंट, DRDO में कार्यक्रम का आयोजन किया  जाएगा।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

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तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन के दौरान इस रक्षा कॉरिडोर के लिए 3,038 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की गयी। विश्व की अग्रणी रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने इस कॉरिडोर में निवेश करने की इच्छा जताई है।

मुख्य बिंदु

  • इस रक्षा कॉरिडोर में चेन्नई, होसुर, सालेम, कोइम्बतूर और तिरुचिरापल्ली पांच शहर शामिल है।
  • इन पांच शहरों में पहले से रक्षा निर्माण इकोसिस्टम मौजूद है, यहाँ पर ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड, PSU रक्षा निर्माता तथा अन्य सहयोग उद्योग मौजूद हैं।
  • इस रक्षा कॉरिडोर से देश में रक्षा उत्पादन में तीव्रता आएगी।
  • इस कॉरिडोर की सहायता से भारत को रक्षा निर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने में सहायता मिलेगी।
  • इस कॉरिडोर की विशेषता हवाई उपकरण निर्माण होगी।
  • तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर देश का दूसरा रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर है। भारत का पहला रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर पिछले वर्ष अगस्त में उत्तर प्रदेश के अलीगढ में शुरू किया गया था।

भारत के कुल निर्यातों में तमिलनाडु का स्थान पांचवा है, तमिलनाडु भारत के कुल निर्यातों का 9.8% निर्यात करता है। इस कॉरिडोर की सहायता से निर्यात के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

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