रक्षा मंत्रालय

भारत ने 101 रक्षा उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाया

9 अगस्त, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि भारत ने स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 101 वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा 101 वस्तुओं की सूची तैयार की गई थी। यह भारत को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

यह निर्णय देश के रक्षा उद्योगों को प्रतिबंधित सूची में वस्तुओं के निर्माण का अवसर प्रदान करने के लिए किया गया है। उद्योग अपने स्वयं के डिजाइन को अपना सकते हैं या डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को अपना सकते हैं।

चयनित 101 वस्तुओं में लगभग 260 योजनाएँ शामिल हैं। उन्हें 2015 से 2020 के बीच 3.5 लाख करोड़ रुपये की लागत से त्रि-सेवाओं द्वारा अनुबंधित किया गया था। इसके अलावा, अगले 6 से 7 वर्षों में घरेलू उद्योगों पर 4 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध प्रदान किया जायेंगे। इसलिए, यह घरेलू उद्योगों को बहुत बढ़ावा देता है। इससे भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

101 वस्तुओं में से, लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये सेना और भारतीय वायु सेना के लिए अनुमानित हैं।  आयात पर प्रतिबंध 2020 और 2024 के बीच लागू किया जायेगा। भारतीय सेना को दिसंबर 2021 तक 200 बख्तरबंद लड़ाकू वाहन आयात करने है। यह आयात 5,000 करोड़ रुपये का है।

खरीद

वर्ष 2020-21 के लिए रक्षा मंत्रालय ने पूंजी खरीद को घरेलू और विदेशी पूंजी खरीद के रूप में विभाजित किया है। घरेलू खरीद के लिए 52,000 करोड़ रुपये का एक अलग बजट बनाया गया है।

रक्षा खरीद

मार्च 2020 में रक्षा खरीद प्रक्रिया, 2020 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ाना है। यह “मेक इन इंडिया” पहल का समर्थन करेगा।

रक्षा खरीद प्रक्रिया को 2002 में लागू किया गया था और तब से इसमें कई बार संशोधित किया गया है ताकि घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन दिया जा सके और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।

इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से ऐसी प्रक्रियाएं शामिल हैं जो रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल बनाती हैं और भारतीय सशस्त्र बलों की सभी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में भारत को आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करती हैं।

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37 एयरफ़ील्ड्स को आधुनिक बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने टाटा पॉवर के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये

8 मई, 2020 को रक्षा मंत्रालय ने टाटा पॉवर SED के साथ भारतीय वायु सेना की 37 एयर फील्ड के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना की लागत लगभग 1,200 करोड़ रुपये है।

योजना

एयरफील्ड अधोसंरचना के आधुनिकीकरण के चरण-1 के तहत, भारतीय वायु सेना के एयरफील्ड को अपग्रेड किया गया था। इस कार्यक्रम के चरण-2 के तहत अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। फेज -2 के तहत नेविगेशनल एड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जायेगा।

दूसरे चरण में आधुनिक एयरफील्ड उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग जैसे कि कैट-II इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और एयर फील्ड लाइटिंग सिस्टम शामिल हैं।

आधुनिक उपकरणों को सीधे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से जोड़ा जायेगा। यह एयरफील्ड सिस्टम का उत्कृष्ट नियंत्रण प्रदान करेगा।

एयरफील्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण

इस परियोजना के तहत भटिंडा में पहली आधुनिक हवाई क्षेत्र प्रणाली स्थापित की गई थी। यह परियोजना 2,500 करोड़ रुपये की थी। प्रथम चरण के तहत, लगभग 30 हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण किया गया था। इस योजना पर 2011 में 1,219 करोड़ रुपये की कुल लागत पर हस्ताक्षर किये गये थे।

चरण-I के लिए भी TATA समूह के साथ भी अनुबंध किया गया था। प्रथम चरण के तहत, दूरी मापने के उपकरण, स्वचालित हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली, ओमनी-डायरेक्शनल रेडियो रेंज और तकनीकी हवाई नेविगेशन को लागू किया गया।

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