रबी फसल

भारत सरकार ने प्याज के निर्यात को मंज़ूरी दी

सितंबर 2019 में भारत सरकार ने देश में प्याज की कीमतों को नीचे लाने के लिए प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों हरियाणा और महाराष्ट्र में आपूर्ति बाधित होने और बाढ़ के कारण प्रमुख खाद्यान्न वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई थीं।

मुख्य बिंदु

दिसंबर 2019 में प्याज की कीमतें चरम पर पहुंच गईं थी क्योंकि बारिश ने खरीफ की फसल को बुरी तरह से प्रभावित किया। रबी की फसल के आगमन के साथ  प्याज़ की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है, इसलिए भारत सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। इसके अलावा, प्याज पर लगाए गए न्यूनतम निर्यात मूल्य 850 डालर प्रति टन  को भी हटा दिया गया है।

न्यूनतम निर्यात मूल्य

एक निर्यातक अपने उत्पाद को न्यूनतम निर्यात मूल्य से नीचे नहीं बेच सकता है। न्यूनतम निर्यात मूल्य आमतौर पर बासमती चावल और प्याज पर लगाया जाता है ताकि उनके निर्यात की मात्रा को सीमित किया जा सके।

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रबी फसल की बुवाई में 36 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई

31 दिसम्बर, 2019 को केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते  हुए कहा है कि रबी फसल की बुवाई में 36 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण मृदा की नमी में वृद्धि होना  है।

मुख्य बिंदु

पिछले वर्ष रबी फसल की बुवाई 536 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी थी, इस वर्ष यह क्षेत्रफल 571 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें से 297 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई की गयी है। चावल की बुवाई 14 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाज की बुवाई 46 लाख हेक्टेयर तथा आयलसीड की बुवाई 74 लाख हेक्टेयर भूमि पर की गयी है।

रबी फसलें

भारत में प्रमुख रबी फसलें गेहूं, जौ, तिल, मटर और सरसों हैं। रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर और दिसम्बर के बीच की जाती है, यह फसलें अप्रैल और जून के बीच काटी जाती हैं। भारत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब,  हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई की जाती है।

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