राजनाथ सिंह

नई दिल्ली में किया गया रक्षा व होम लैंड सिक्यूरिटी एक्सपो का आयोजन

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 दिवसीय रक्षा व होमलैंड सिक्यूरिटी प्रदर्शनी व सम्मेलन, 2018 का उद्घाटन नई दिल्ली में किया। इसका आयोजन PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु व माध्यम उद्योग मंत्रालय के सहयोग से संयुक्त रूप से रूप से किया जा रहा है।

रक्षा व होमलैंड सिक्यूरिटी प्रदर्शनी व सम्मेलन, 2018

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य देश को होम लैंड सिक्यूरिटी व रक्षा के मामले में आत्म निर्भर बनाना है। होम लैंड सिक्यूरिटी में प्राकृतिक व गैर-इरादतन आपदाओं से देश के नागरिकों की सुरक्षा को शामिल किया जाता है। उपरोक्त प्राकृतिक दुर्घटनाओं का सामना करने के लिए कई कंपनियां जीपीएस, राडार, ID सिस्टम, एक्सेस कण्ट्रोल, थर्मल इमेजिंग, IR उपकरण इत्यादि का निर्माण करती हैं। रक्षा व होमलैंड सिक्यूरिटी प्रदर्शनी व सम्मेलन, 2018 में होम लैंड सिक्यूरिटी उपकरण उपलब्ध करवाने वाली 200 से अधिक भारतीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इस सम्मेलन में यह कंपनियां देश के उच्च रक्षा संस्थानों से अपने विचार साझा करेंगी।

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2021 जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में पहली बार डाटा एकत्रित किया जायेगा

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना 2021 में अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में डाटा एकत्रित करने की घोषणा की है, स्वतंत्रता के बाद ऐसा पहली बार होगा। मंडल आयोग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दिए जाने के 25 वर्ष बाद इस डाटा को एकत्रित किया जा रहा। यह आरक्षण 1931 की जनसँख्या में एकत्रित किये गए डाटा के आधार पर प्रदान किया गया था।

2021 की जनसँख्या में ओबीसी जनसँख्या के बारे में डाटा एकत्रित करने के निर्णय केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली बैठक में लिया गया। इस डाटा का उपयोग ओबीसी वर्ग के उप-वर्गीकरण के लिए किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

वर्ष 1953 में राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 340 के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन काका केलकर की अध्यक्षता में किया था। इस आयोग का गठन अनुसूचित जाति व जनजाति के अतिरिक्त देश में राष्ट्रीय स्तर पर किसी अन्य पिछड़े वर्ग को चिन्हित करने के लिए किया गया था। इसके बाद 1979 में बी. पी. मंडल की अध्यक्षता में मंडल आयोग का गठन किया गया। मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1257 समुदायों को पिछड़ा हुआ बताया था। इस आयोग ने आरक्षण के कोटा में वृद्धि करने की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों को 1990 में वी. पी. सिंह सरकार ने स्वीकृत किया और इनका क्रियान्वयन किया।

पिछली UPA सरकार ने भी जातीगत सामाजिक व आर्थिक जनगणना की मांग को स्वीकार किया। इस जनगणना में 4,893 करोड़ रुपये का व्यय किया गया था। परन्तु भारत के रजिस्ट्रार ने इस जनगणना में कई गलतियों को चिन्हित किया, जिस कारण इस डाटा को सार्वजनिक नहीं किया जा सका।

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