राष्ट्रीय अभिलेखागार

“द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी” पुस्तक को नई दिल्ली में लांच किया गया

केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने नई दिल्ली में “द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी” (1943-44) पुस्तक को लांच किया। इस पुस्तक को भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के साथ मिलकर लांच किया गया है।

मनु गाँधी (मृदुला) महात्मा गाँधी के भतीजे जयसुखलाल अमृतलाल गाँधी की पुत्री थीं, वे 30 जनवरी, 1948 तक गांधीजी के साथ रहीं। वे गांधीजी की कस्तूरबा गाँधी की सहयोगी भी थीं।

द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी

इस पुस्तक को वास्तविक रूप में गुजराती में लिखा गया था। इस पुस्तक का अनुवाद त्रिदिप सुहृद द्वारा किया गया है। इस डायरी के पहले खंड में 1943-44 के कालखंड को कवर किया गया है। इसमें मनु गाँधी तथा महात्मा गाँधी के जीवन का वर्णन है।

राष्ट्रीय अभिलेखागार

भारतीय अभिलेखागार की स्थापना में सैंडमैन की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण थी, वे सिविल ऑडिटर थे, उन्होंने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को “ग्रैंड सेंट्रल आर्काइव” में स्थानांतरित करने के महत्त्व पर बल दिया था। 1889 में एलफिंस्टोन कॉलेज, बॉम्बे के प्रोफेसर से जी. डब्ल्यू. फारेस्ट को भारत सरकार के विदेश विभाग के रिकॉर्ड की छान-बीन करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन के सभी रिकार्ड्स को केन्द्रीय भंडार में स्थानांतरित करने की अनुशंसा की थी। इसके पश्चात् 11 मार्च, 1891 को कलकत्ता में इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट भवन में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट (IRD) की स्थापना की गयी थी।

1911 में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट को दिल्ली स्थानांतरित किया गया। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय अभिलेखागार कर दिया। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार को संस्कृति मंत्रालय से जोड़ा गया है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में स्थित है, इसके तीन रिकॉर्ड केंद्र जयपुर, पुदुचेरी तथा भुबनेश्वर में स्थित है।

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पी.वी. रमेश को राष्ट्रीय अभिलेखागार का महानिदेशक चुना गया

कैबिनेट नियुक्ति समिति ने हाल ही पी.वी. रमेश को राष्ट्रीय अभिलेखागार का महानिदेशक चुना गया। वर्तमान वे ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

राष्ट्रीय अभिलेखागार

भारतीय अभिलेखागार की स्थापना में सैंडमैन की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण थी, वे सिविल ऑडिटर थे, उन्होंने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को “ग्रैंड सेंट्रल आर्काइव” में स्थानांतरित करने के महत्त्व पर बल दिया था। 1889 में एलफिंस्टोन कॉलेज, बॉम्बे के प्रोफेसर से जी. डब्ल्यू. फारेस्ट को भारत सरकार के विदेश विभाग के रिकॉर्ड की छान-बीन करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन के सभी रिकार्ड्स को केन्द्रीय भंडार में स्थानांतरित करने की अनुशंसा की थी। इसके पश्चात् 11 मार्च, 1891 को कलकत्ता में इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट भवन में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट (IRD) की स्थापना की गयी थी।

1911 में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट को दिल्ली स्थानांतरित किया गया। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय अभिलेखागार कर दिया। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार को संस्कृति मंत्रालय से जोड़ा गया है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में स्थित है, इसके तीन रिकॉर्ड केंद्र जयपुर, पुदुचेरी तथा भुबनेश्वर में स्थित है।

 

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