राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

भारत और जापान द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला का आयोजन |

भारत और जापान जो विश्व के दो सर्वाधिक आपदा संभावित देश है उनके द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर पहली कार्यशाला का आयोजन 19 मार्च से किया गया ।

प्रमुख बिंदु

-आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला का आयोजन संयुक्त रूप से भारत और जापान की सरकारों के गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है।
-आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला 2017 में भारत-जापान के बीच हस्ताक्षर किये गए सहयोग समझौते का परिणाम है जिसका उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग के क्षेत्रों पर एक विशिष्ट द्विपक्षीय कार्य योजना का विकास करना है।
-19 मार्च से शुरू हुई इस दो दिवसीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला में विशेषज्ञ आपदा जोखिम कम करने , खासकर भूकंपों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
-जापान प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर के तट पर स्थित है और भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश है।
-विनाशकारी भूकंपों के इसके लंबे इतिहास को देखते हुए, जापान में समुदायिक जागरूकता का स्तर बेहद उच्च है।
-इसका प्रौद्योगिकीय ज्ञान, विशेष रूप से, भूकंप जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में दुनिया के सर्वाधिक उन्नत देशों में से एक है।
-भारत में तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है और अवसंरचना क्षेत्र में व्यापक निवेश तय है। चूँकि भारत के भू-भाग का लगभग 59% मध्यम से बेहद तीव्र आवेग वाले भूकंपों के प्रति संवेदनशील है, यह न केवल किसी भूकंप की स्थिति में मानव जीवन को बचाएगा बल्कि आर्थिक रूप से भी यह लाभदायक है।
-आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला ऐसे खोज करने का अवसर भी प्रस्तुत करेगी कि किस प्रकार जापान अपनी अवसंरचना को वर्तमान एवं भविष्य के आपदा जोखिमों से निपटने के अनुकूल बनाए रखने में निवेश करता है।

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मुम्बई हवाई अड्डे पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सीबीआरएन आपात प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजित किया

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) मुम्बई के छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्राथमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। 6 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की 5 मार्च को शुरूआत हुई। इसका मुख्य उद्देश्य हवाई अड्डों पर सीबीआरएन आपात के दौरान हवाई अड्डा आपात संचालकों (एईएच) की तैयारी को अधिक बेहतर बनाना है। सीबीआरएन, जैविक, रेडियोधर्मी आपात रासायनिक तथा परमाणु पदार्थों से पैदा होने वाले खतरों से संबंधित है। यह प्रशिक्षण भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) के सहयोग के माध्यम से आयोजित किया गया है।
सीबीआरएन आपात के संचालन में विशेष कौशल और प्रयास की जरुरत होती है। मूल रूप से सीबीआरएन आपात से जुड़ा एक छोटा सा खतरा भी एयर पोर्ट पर मौजूद लोगों में दहशत व डर पैदा कर सकता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हमारे हवाई अड्डों पर सीबीआरएन सुरक्षा को अधिक बेहतर बनाएगा और हवाई अड्डा आपात संचालकों (एईएच) को किसी भी प्रकार के सीबीआरएन आपात का मुकाबला करने में सक्षम बनाएगा।
इसके अंतर्गत व्याख्यान और प्रायोगिक प्रशिक्षण भी शामिल हैं। इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के उपयोग तथा खतरों को ढूंढने का प्रशिक्षण भी शामिल है। हवाई अड्डा आपात संचालकों (एईएच) को सीबीआरएन आपातों से निबटने के आलावा मनोवैज्ञानिक-सामाजिक सहायता व प्राथमिक चिकित्सा का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ),भाभा परमाणु शोध संस्थान(बीएआरसी), आईएनएमएएस, राष्ट्रीय स्वास्थ्य और न्यूरो विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएएनएस) जैसे हितधारक विभागों के विशेषज्ञ प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है

सीबीआरएन आपातों के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण कुल 200 कर्मियों को दिया जा रहा है।

इसके पहले कोलकाता और चेन्नई हवाई अड्डों पर इसी तरह के कार्यक्रम सफलता पूर्वक किए जा चुके हैं। हवाई अड्डा आपात संचालकों (एईएच) को सक्षम बनाने के लिए एनडीएमए पूरे देश के हवाई अड्डों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

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