राष्ट्रीय

भारतीय रेलवे ने समेकित ब्रिज प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की

भारतीय रेलवे ने अपनी पहली समेकित ब्रिज प्रबंधन प्रणाली (IR-BMS, Indian Railways-Bridge Management System) की शुरुआत की, जो एक लाख पचास हजार रेलवे पुलों से संबंधित आंकड़ों का संग्रह करने के लिए एक वेब-सक्षम आईटी एप्लीकेशन है.

भारतीय रेलवे-ब्रिज प्रबंधन प्रणाली (IR-BMS)

आईआर-बीएमएस का उद्देश्य अपने पुलों के बारे में विभिन्न गतिविधियों से संबंधित जानकारी का सार्थक आकलन, विश्लेषण और प्रसार करना है. यह वेब-आधारित प्लेटफार्म है जो ब्रिज मास्टर डेटा, डेटा का काम, निरीक्षण और पुलों और अन्य आवश्यकताओं के निरीक्षण और रखरखाव के बारे में जानकारी दिखाएगा. इसे रेलवे ट्रैक पर एक ब्रिज के गिरने के कुछ दिन बाद केंद्रीय रेल मंत्री पियुष गोयल द्वारा लॉन्च किया था. इस एप के माध्यम से पुलों की क्षमता और कार्य से जुड़े विभिन्न आंकड़े तथा रखरखाव संबंधी सूचना तथा अन्‍य जरूरी बातें भी प्रदर्शित की जाएंगी. हाल ही में रेल मंत्री पीयुष गोयल ने रेलवे स्‍टेशनों की सौंदर्यकरण प्रतियोगिता के पुरस्‍कार भी वितरित किए है.

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

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सेप्टिक टैंक में मानव प्रवेश को खत्म करने के लिए सरकार ने शुरू किया ‘टेक्नोलॉजी चैलेंज’

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoUHA) ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए समाधान के रूप में ‘टेक्नोलॉजी चैलेंज’ शुरू की है. इसके तहत सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई हेतु उपयुक्त तकनीकों को बढ़ावा देते हुये उनमें मानव प्रवेश को खत्म किया जाएगा.

मुख्य विशेषताएं

‘टेक्नोलॉजी चैलेंज’ का मुख्य उद्देश्य सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई में मानव हस्तक्षेप को खत्म करना रहेगा. साथ ही इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव हस्तक्षेप से बचने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक प्रक्रिया नवाचारों की पहचान करना भी है. यह व्यावहारिक व्यावसायिक मॉडल का भी समर्थन करेगा जो विभिन्न आकारों, भौगोलिक क्षेत्रों और शहरों के वर्ग के लिए उपयुक्त हैं.

इसे दो अलग-अलग श्रेणियों में संयोजित किया जाएगा. श्रेणी 1: मानव प्रवेश की आवश्यकता को खत्म करने के लिए सीवरेज सिस्टम की सफाई और रखरखाव के लिए तकनीकी समाधान. श्रेणी 2: मानव प्रवेश की आवश्यकता को खत्म करने के लिए सेप्टिक टैंक की सफाई और रख-रखाव के लिए तकनीकी समाधान. यह चैलेंज महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का हिस्सा होगा जो 2 अक्टूबर, 2018 को आयोजित किया जाएगा. व्यक्तिगत अन्वेषक, कंसोर्टियम साझेदार, कंपनियां, अकादमिक संस्थान, आर एंड डी केंद्र, एनजीओ और नगरपालिका निकाय इस चुनौती में भाग ले सकते हैं.

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