रिज़र्व बैंक

अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के दौरान भारत के राजकोषीय घाटे में वृद्धि

भारत के राजकोषीय घाटे में अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के दौरान वृद्धि देखने को मिली है । राजकोषीय घाटा बढ़कर अब 7.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह पूरे वित्त वर्ष 2017-18 के लिये तय 5.95 लाख करोड़ रुपए के संशोधित लक्ष्य के अनुमान का कुल 120.3 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा बढऩे की मुख्य वज़ह गैर कर राजस्व का अनुमान से कम रहना है। इस समयावधि में सरकार के पास 60 प्रतिशत राजस्व आया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 62.4 प्रतिशत राजस्व आया था। बैंकों और सरकारी कंपनियों से आशा से कम लाभांश रहने के कारण (जितने लाभांश की इनसे प्राप्त होने की उम्मीद की जा रही थी) 2017-18 का लाभांश लक्ष्य घटाकर 1.06 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया, जो पहले 1.46 लाख करोड़ रुपए था।

वर्तमान स्थिति

० राजकोषीय घाटे को काबू में लाने के लिये रिज़र्व बैंक और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने सरकार की अहम मदद की है। इससे वर्ष 2017-18 के लिये सरकार का राजकोषीय घाटा 5.95 लाख करोड़ रुपए के संशोधित लक्ष्य से शायद थोड़ा कम हो गया है।
० फरवरी के अंत तक यह संशोधित लक्ष्य से 1.2 लाख करोड़ रुपए अधिक पहुँच गया था। केंद्रीय बैंक ने सरकारी खजाने में 100 अरब रुपए का अतिरिक्त अधिशेष जमा कराया, जबकि एफसीआई ने वित्त मंत्रालय द्वारा आवंटित 500 अरब रुपए लौटाए। इससे सरकार को राजकोषीय घाटे को काबू में लाने में थोड़ा मदद मिली।
० राजकोषीय घाटा अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 की अवधि के लिये बेकाबू होकर 7.15 लाख करोड़ पहुँच गया था जो पूरे वर्ष के संशोधित अनुमान का 120 फीसदी था।
० किसी भी वित्त वर्ष में 11 महीने की अवधि में यह सर्वाधिक घाटे की स्थिति थी। वर्ष 2017-18 के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। मार्च महीने के लिये प्रत्यक्ष कर संग्रह और विनिवेश की कुछ जानकारी के अलावा कोई आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

राजकोषीय घाटा

केंद्र सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इससे यह पता चलता है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिये कितनी उधारी की ज़रूरत होगी। कुल राजस्व का हिसाब-किताब लगाने में उधारी को शामिल नहीं किया जाता है। राजकोषीय घाटा आमतौर पर राजस्व में कमी या पूंजीगत व्यय में अत्यधिक वृद्धि के कारण होता है। पूंजीगत व्यय लंबे समय तक इस्तेमाल में आने वाली संपत्तियों जैसे-फैक्टरी, इमारतों के निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर होता है। आमतौर पर केंद्रीय बैंक (रिज़र्व बैंक) से उधार लेकर राजकोषीय घाटे की भरपाई की जाती है या इसके लिये छोटी और लंबी अवधि के बॉन्ड के ज़रिये पूंजी बाज़ार से फंड जुटाया जाता है।

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भुगतान बैंक के रूप में जियो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड ने परिचालन शुरू किया

भुगतान बैंक के रूप में जियो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड ने परिचालन शुरू कर दिया है. रिज़र्व बैंक ने भारत में भुगतान बैंक के कारोबार को जारी रखने के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 (1) के तहत जियो पेमेंट्स बैंक को लाइसेंस जारी किया है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुंबई उन 11 आवेदकों में से एक था, जिसे भुगतान बैंक की स्थापना हेतु सैद्धांतिक रूप से मंजूरी प्राप्त हुई .

मुख्य तथ्य

० कोई भी जियो पेमेंट्स बैंक में बचत खाता खुलवा सकता हैं.
० जियो पेमेंट्स बैंक में एक लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं.
० यह अपना डेबिट कार्ड भी जारी कर सकता है.
० यह पेमेंट्स बैंक जियो ने स्टेट बैंक के साथ साझेदारी में खोला है.इस पेमेंट्स बैंक में 70 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्री की और 30 फीसदी हिस्सेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की है.
० इस पेमेंट्स बैंक से ऋण नहीं मिल सकेगा.

भारत में वर्तमान में आदित्य बिड़ला पेमेंट्स बैंक, एयरटेल पेमेंट्स बैंक, फिनो पेमेंट्स बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और पेटीएम पेमेंट्स बैंक मौजूद हैं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड एक भारतीय कंपनी है, जिसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है। पांच प्रमुख क्षेत्रों में यह कंपनी कार्यरत है: पेट्रोलियम शोधन और विपणन, पेट्रोलियम अन्वेषण और उत्पादन, पेट्रोकेमिकल्स, खुदरा तथा दूरसंचार।

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत की दूसरी सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है एवं यह राजस्व के मामले में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है.

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