रिवर्स रेपो दर

भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की; सभी ऋणों पर 3 महीने की मोहलत दी जायेगी

27 मार्च, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक ने COVID-19 के कारण होने वाली आर्थिक मंदी का मुकाबला करने के लिए उपायों की घोषणा की। COVID-19 महामारी के कारण केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक आयोजित की। यह वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आरबीआई का 7वां द्वि-मासिक मौद्रिक नीति विवरण था। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर इन उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था में 3.74 लाख करोड़ रुपये आयेंगे।

मुख्य बिंदु

भारत ने अपनी आर्थिक गतिविधि को बंद कर दिया है, आरबीआई का मुख्य उद्देश्य वित्त को प्रवाहित रखना है। रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके इसे 4.4% कर दिया गया है, रिवर्स रेपो रेट में 90 bpsबेसिस पॉइंट्स की कटौती की गयी, अब यह 4% है। भारतीय रिज़र्व बैंक  सभी ऋणों पर तीन महीने की मोहलत प्रदान करने के लिए बैंकों और अन्य संस्थानों को आदेश दिया है।

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है। यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है। जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है। अत: कहा जा सकता है कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है।

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है। यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है। बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं।

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आरबीआई ने रेपो रेट को अपरिवर्तित 5.15% रखा

आरबीआई ने रेपो रेट (अल्पकालिक उधार दर) को अपरिवर्तित 5.15% पर रखा है। यह निर्णय आरबीआई की 6वीं द्विमासिक नीति समीक्षा के दौरान लिया गया। वर्तमान में  रेपो रेट 5.15% पर है, यह 2010 के बाद का निम्नतम स्तर है।

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है। यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है। जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है। अत: कहा जा सकता है कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है।

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है। यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है। बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। 1 अप्रैल सन 1935 को इसकी स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई थी।

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