रोहिंग्या

एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश के भासन चार द्वीप में रखा जाएगा

बांग्लादेश सरकार ने भासन चार द्वीप में एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने की योजना बनायी है।

गौरतलब है कि मानसून में अक्सर यह द्वीप पानी में डूब जाता है। अब इस द्वीप के चारो ओर बाड़बन्दी करवाई गयी है। हालाँकि अब तक रोहिंग्या शरणार्थियों को इस द्वीप पर बसाने के लिए तिथि की घोषणा नहीं की गयी है। शरणार्थियों के लिए मस्जिद, अस्पताल व घरों का निर्माण किया जा चुका है।

म्यांमार में उत्पीड़न के बाद 7 लाख से अधिक रोहिंग्या लोग अपने देश को छोड़कर बांग्लादेश में आ गये थे।

आलोचना

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने बांग्लादेश सरकार के इस निर्णय को संचालन व क्रियान्वयन की दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण बताया है। जबकि ह्यूमन राइट्स वाच ने इस निर्णय की निंदा करते हुए इसे मानवाधिकार आपदा कहा है।

भारत में रोहिंग्या

2017 में भारत में 40,000 रोहिंग्या भारत में रह रहे थे। भारत में लगभग 16,000 लोगों को संयुक्त राष्ट्र के तहत शरणार्थी के रूप में पंजीकृत किया गया है। भारत में रोहिंग्या दिल्ली, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और तमिलनाडु में रह रहे हैं।

भासन चार

इस द्वीप को हटिया उपजिला भी कहा जाता है। यह तट से 37 मील दूर स्थित है। यह द्वीप जून से सितम्बर के बीच भारी वर्षा के कारण पाने से भर जाता है।

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म्यांमार ने वा लोन और क्याव सो ओऊ को 511 दिनों की कैद के बाद जेल से मुक्त किया

म्यांमार ने वा लोन और क्याव सो ओऊ को जेल से मुक्त कर दिया है, गौरतलब है कि रायटर्स समाचार एजेंसी के इन दो पत्रकारों ने जेल में 500 से अधिक दिन बिताये। इन दोनों पत्रकारों को सितम्बर में दोषी करार दिया गया था और उन्हें सात वर्ष कैद की सजा दी गयी थी। म्यांमार के राष्ट्रपति विन मिंट ने 6,520 कैदियों को हाल ही में क्षमादान दिया, इन कैदियों की सूची में रायटर्स के यह दो पत्रकार भी शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

वा लोन और क्याव सो ओऊ म्यांमार में 10 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या की जाँच पर कार्य कर रहे थे, इन 10 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या का आरोप सुरक्षा बलों तथा बौद्ध नागरिकों पर लगा था। यह घटना म्यांमार के रखीन प्रांत में घटित हुई थी। अगस्त, 2017 के बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने बड़ी संख्या में म्यांमार से पलायन किया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस घटनाक्रम में 7,30,000 से अधिक रोहिंग्या मुलसमान म्यांमार से भागकर बांग्लादेश चले गये थे। म्यांमार में मानवाधिकारों के उल्लंघन इस घटना की विश्व भर में निंदा की गयी थी। इसके बाद दिसम्बर, 2017 में वा लोन और क्याव सो ओऊ को गिरफ्तार किया गया था।

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