लद्दाख

रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय सम्मेलन

भारत के विदेश मंत्री श्री एस. जय शंकर 22 जून, 2020 को अपने रूसी और चीनी समकक्षों के साथ एक संयुक्त आभासी सम्मेलन आयोजित करेंगे।

मुख्य बिंदु

इस दौरान एस. जयशंकर सीमा पर भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हालिया गतिरोध पर चर्चा कर सकते हैं। यह बैठक रूस की पहल के साथ बुलाई जा रही है। इसमें देश क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे और क्षेत्रीय स्थिरता पर अपने विचारों को सिंक्रनाइज़ करेंगे।

पृष्ठभूमि

भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ 5 सप्ताह से अधिक समय से आमने-सामने हैं। विवाद सुलझाने के लिए दोनों देश कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत कर रहे हैं।

रूस शंघाई सहयोग संगठन (शंघाई सहयोग संगठन), रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय मंच और ब्रिक्स पर चर्चा का विस्तार कर सकता है। वे अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर चर्चा कर सकते हैं।

आरआईसी (रूस भारत और चीन) के विदेश मंत्रियों की बैठक में 7,200 किलोमीटर लंबे INSTC (अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे) में कनेक्टिविटी परियोजनाओं की चर्चा भी शामिल होगी।

INSTC यूरोप के साथ अफगानिस्तान, ईरान और मध्य एशिया को जोड़ता है।

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लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की 18वीं खंडपीठ स्थापित की जायेगी

भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) की 18वीं बेंच का उद्घाटन किया ।

मुख्य बिंदु

जम्मू के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) पीठ की स्थापना से कई अदालतों का बोझ कम होगा। यह पीठ सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों से विशेष रूप से निपटेगी।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इससे पहले प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत भारत सरकार ने श्रीनगर और जम्मू को उन स्थानों के रूप में निर्दिष्ट किया था जहां केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) बेंच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए बैठेगी।

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 323 के तहत की गई थी। यह न्यायाधिकरण लोक सेवकों की सेवा की शर्तों के बारे में शिकायतों को दूर करेगा।  केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को उच्च न्यायालय के रूप में कार्य करने की शक्तियां दी गयी हैं। यह प्रशासनिक ट्रिब्यूनल अधिनियम, 1985 की धारा 17 के तहत किया गया है।  ट्रिब्यूनल के कर्मचारियों और अधिकारियों के भत्ते और वेतन केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जायेंगे।

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