लद्दाख

लद्दाख को जम्मू-कश्मीर का तीसरा प्रशासनिक मंडल घोषित किया गया

जम्मू-कश्मीर सरकार ने लद्दाख क्षेत्र के लिए अलग से प्रशासनिक मंडल (डिवीज़न) के निर्माण की घोषणा की है। अब तक जम्मू-कश्मीर राज्य के दो ही मंडल “जम्मू तथा कश्मीर” थे। लद्दाख जम्मू-कश्मीर राज्य का तीसरा प्रशासनिक मंडल होगा।

लद्दाख प्रशासनिक मंडल

लद्दाख प्रशासनिक मंडल में लेह तथा कारगिल जिलों को शामिल किया जाएगा, इसका मुख्यालय लेह में स्थित होगा। लद्दाख प्रशासनिक मंडल के कार्य को शुरू करने  के लिए जल्द ही मंडलीय आयुक्त तथा पुलिस इंस्पेक्टर जनरल की नियुक्ति की जायेगी।

नए मंडल में विभिन्न विभागों में मंडल स्तरीय पदों पर नियुक्ति के लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति इन दफ्तरों का स्थान भी निश्चित करेगी।

कारगिल तथा लेह का स्थानीय प्रशासन का कार्य पर्वतीय विकास परिषदों द्वारा संभाला जाता है। भौगोलिक स्थिति विपरीत होने के कारण लेह विकास गतिविधियों से कटा हुआ है। प्रशासनिक मंडल बन जाने के कारण अब लद्दाख क्षेत्र में विकास की रफ़्तार को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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लद्दाख की दर्द आर्यन जनजाति

दर्द आर्यन जनजाति जम्मू-कश्मीर के लद्दाखक्षेत्र से सम्बंधित है। इस जनजाति को इसकी उत्कृष्ट परम्पराओं व वस्त्रों के लिए जाना जाता है। वर्तमान यह जनजाति अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोये रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

मुख्य बिंदु

हाल ही में दर्द आर्यन फेस्टिवल 2019 के दौरान, इसके प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। दर्द आर्यन जनजाति को आर्यों का वंशज माना जाता है। मौजूदा समय में तीव्र आधुनिकीकरण, प्रवास तथा धर्मान्तरण के कारण यह जनजाति काफी संघर्ष कर रही है। यह जनजाति मुख्य रूप से लेह तथा कारगिल जिले के धा, हनु, बीमा, दार्चिक तथा गरकोन गावों में निवास करती है। इन गावों को सामूहिक रूप से आर्य घाटी कहा जाता है। इस जनजाति की शारीरिक विशेषताएं, सामाजिक जीवन, संस्कृति तथा भाषा काफी अलग है। शोधकर्ताओं का मानना है कि लद्दाख के आर्य अथवा ब्रोक्पा सिकंदर की सेना में शामिल थे। वे इस क्षेत्र में लगभग 2000 वर्ष पूर्व आये थे। इस जनजाति की जनसँख्या लगभग 4,000 है।

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