लाभांश भुगतान

आरबीआई ने देना बैंक को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की श्रेणी में डाला

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने देना बैंक को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचे के तहत रखा है। इसके तहत देना बैंक को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के कारण खराब वित्तीय स्वास्थ्य को देखते हुए ताजा क्रेडिट बढ़ाने से रोक दिया है। यह देना बैंक को पीसीए ढांचे के तहत उधार देने पर प्रतिबंध लगता है।

मुख्य तथ्य

इसका मतलब है कि बैंक पहले से स्वीकृत क्रेडिट सुविधाओं के लिए ऋण तो बांट सकता है, लेकिन ताजा ऋण (fresh lending) स्वीकृत नहीं कर सकता। इसके अलावा, आरबीआई ने बैंक में अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर भी रोक लगा दी है। यदि बैंक लाभप्रदता में सुधार करता है और खराब ऋण के अनुपात को कम करता है तो आरबीआई इन प्रतिबंधों को हटा सकता है।

पृष्ठभूमि

मई 2017 में, आरबीआई ने देना बैंक को पीसीए ढांचे के तहत रखा था, जिसने लाभांश भुगतान पर प्रतिबंध सहित अन्य प्रतिबंध लगाए गए थे। पहले के प्रतिबंधों के बावजूद, देना बैंक के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार के संकेत नहीं दिखाई दिए , जिससे बैंकिंग नियामक ने देना बैंक पर नया उधार देने (fresh lending) पर प्रतिबन्ध लगाया था।

तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए)

आरबीआई कमजोर तथा वित्तीय संकट ग्रस्त बैंकों पर आकलन, निगरानी, नियंत्रण और सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए कार्य करता हैं।

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भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सार्वजनिक बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) श्रेणी में रखा

बिगड़ते प्रदर्शन के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 21 सरकारी बैंकों में से 11 सार्वजनिक बैंकों (पीएसबी) को अपने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा के तहत रखा है। पीसीए ढांचे के तहत तीन-चार अन्य सार्वजनिक बैंकों को लाए जाने की उम्मीद है।
पीसीए ढांचे में वर्त्तमान में मौजूद 11 बैंक हैं आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम), यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई के नियमों से नियामक को कुछ प्रतिबंधों की अनुमति मिल सकती है जैसे शाखा विस्तार को और लाभांश भुगतान को रोकना। किसी एक इकाई या क्षेत्र में यह बैंक की ऋण सीमा को सीमित भी कर सकता है। बैंकों पर लगाए जा सकने वाले अन्य सुधारात्मक कार्यों में विशेष लेखा परीक्षा, पुनर्गठन कार्य और वसूली योजना के सक्रियण शामिल हैं। बैंकों के प्रमोटरों को भी नए प्रबंधन को लाने के लिए कहा जा सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक पीसीए के तहत, बैंक के बोर्ड को स्थानांतरित कर सकता है।

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