लेह

रोहतांग सुरंग का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा

केन्द्रीय कैबिनेट ने रोहतांग सुरंग का नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने के लिए मंज़ूरी दे दी है। यह नया नाम 25 दिसम्बर (श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिवस) से लागू होगा।

रोहतांग सुरंग

श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 3 जून, 2000 को रोहतांग सुरंग के निर्माण का निर्णय लिया गया है, यह सुरंग रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह सुरंग हिमाचल प्रदेश में स्थित है। इस सुरंग की कुल लम्बाई 8.8 किलोमीटर है। यह सुरंग लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, यह इतनी ऊंचाई पर निर्मित सबसे लम्बी सुरंगों में से एक है। गौरतलब है कि इस सुरंग के कारण मनाली और लेह के बीच की दूरी में 46 किलोमीटर की कमी आएगी। यह सुरंग रणनीतिक दृष्टि से तो बेहद महत्वपूर्ण है परन्तु स्थानीय लोगों के लिए भी यह बेहद उपयोगी है।

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सोवा रिग्पा क्या है?

हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने लेह में राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्थान की स्थापना को मंज़ूरी दी है। यह संस्थान केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान होगा। यह देश में सोवा-रिग्पा का सर्वोच्च संस्थान होगा।

इस संस्थान के द्वारा सोवा-रिग्पा के अनुसन्धान व शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय उप-महाद्वीप में सोवा-रिग्पा औषधि पद्धति पुनर्जीवित हो सकेगी।

सोवा रिग्पा क्या है?

सोवा रिग्पा एक तिब्बत्ती औषधि प्रणाली है। यह विश्व की सबसे प्राचीन औषधि प्रणालियों में से एक है। इस प्रणाली की शुरुआत तिब्बत में हुई थी। इसका उपयोग भारत, तिब्बत, नेपाल, भूटान, चीन मंगोलिया और रूस में किया जाता है। भारत में इस पारंपरिक औषधि पद्धति का उपयोग अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, दार्जीलिंग, धर्मशाला, लाहौल-स्पीती तथा लद्दाख में किया जाता है। युथोग योंतेन गोंपो को सोवा रिग्पा का पिता कहा जाता है।

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