वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर

29 जुलाई : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट से हुई थी। इसका उद्देश्य बाघ के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करना व बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना है।

मुख्य बिंदु

WWF के अनुसार 2016 में विश्व भर में बाघ की जनसँख्या लगभग 3900 है। भारत ने बाघ संरक्षण के लिए काफी सराहनीय कार्य किया है, वर्ष 2006 में केवल 1411 बाघ थे जो 2014 में बढ़कर 2226 हो गये। भारत में प्रत्येक चार वर्ष बाद बाघ की गणना की जाती है।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर (WWF)

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, यह संगठन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कार्य करता है। इसकी स्थापना 29 अप्रैल, 1961 को की गयी थी। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के रुए मौवेर्नी में स्थित है। इस संगठन का उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण तथा पर्यावरण पर मानव के प्रभाव को कम करना है। WWF वर्ष1998 से प्रत्येक दो वर्ष बाद लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

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भारत में मृदा जैव विविधता संकटग्रस्त : विश्व वन्यजीव फण्ड

हाल ही में विश्व वन्यजीव फण्ड ने “Global Soil Biodiversity Atlas” जारी की, इसमें भारत को उन देशों की सूची में रखा गया है जो मृदा जैव विविधता के संकट से जूझ रहे हैं। इस एटलस को WWF की द्वि-वार्षिक “लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट” 2018 में जारी किया गया। इस रिपोर्ट में मृदा जैव विविधता तथा परागणकों को उत्पन्न खतरे पर प्रकाश डाला गया है। मृदा जैव विविधता तथा परागणकों का ह्रास प्राकृतिक संसाधनों तथा कृषि के अत्याधिक शोषण के कारण हुआ है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

मृदा विविधता : इसमें मृदा में विद्यमान सूक्ष्म जीवाणुओं तथा सूक्ष्म वनस्पति इत्यादि शामिल हैं।
लाखों सूक्ष्म जीवाणुओं व जीवों की सहायता से मृदा का निर्माण होता है, इसमें बैक्टीरिया, कवक इत्यादि होते हैं। जैव विविधता में जीन्स तथा प्रजातियाँ शामिल होती हैं।
मृदा में विविधता से कई प्रकार की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्राप्त होती है।
WWF के रिस्क इंडेक्स में प्रदूषण, अधिक पशु चारण, गहन कृषि, दावानल, मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण तथा जलवायु परिवर्तन के खतरे को दर्शाया जाता है।
इस एटलस में भारत को मृदा अपरदन को गंभीर खतरे वाले देशों की सूची में रखा गया है, इस श्रेणी में पाकिस्तना, चीन, तथा अन्य कई देश शामिल हैं।
परगणक : भारत में 50 मिलियन हेक्टेयर  के लिए मधुमक्खियों की 150 कोलोनीज़ की आवश्यकता है, परन्तु भारत में केवल 1.2 मिलियन कोलोनीज़ ही मौजूद हैं।
पारिस्थितिकी नुकसान : 1970 के मुकाबले 2014 में मछली, स्तनधारी जीवों, उभयचर जीवों तथा रेंगने वाले जीवों की जनसँख्या में लगभग 60% की कमी आई है। इस अवधि में ताज़े-पानी की प्रजातियों में 83% की कमी आई है। 1970 से अब तक आर्द्रभूमि में 87% की कमी आई है।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर (WWF)

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, यह संगठन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कार्य करता है। इसकी स्थापना 29 अप्रैल, 1961 को की गयी थी। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के रुए मौवेर्नी में स्थित है। इस संगठन का उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण तथा पर्यावरण पर मानव के प्रभाव को कम करना है। WWF वर्ष1998 से प्रत्येक दो वर्ष बाद लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

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