वायु प्रदूषण

लन्दन 24×7 प्रदूषण चार्ज जोन क्रियान्वित करने वाला पहला शहर बना

लन्दन 24×7 प्रदूषण चार्ज जोन क्रियान्वित करने वाला विश्व का पहला शहर बना गया है। लन्दन ने उल्टा लो एमिशन जोन लागू किया है, इसके तहत जो पुराने वाहन उत्सर्जन मानकों के अनुकूल नहीं है उन्हें प्रवेश फीस वसूली जायेगी। अल्ट्रा लो एमिशन जोन से गुजरने वाले पेट्रोल वाहन यूरो-4  तथा डीजल वाहन यूरो-6 मानक के अनुकूल होने चाहिए, यदि वाहन इन मानकों के अनुकूल नहीं तो वाहन चालकों को दैनिक भुगतान करना पड़ेगा।

इस पहल का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। यह अल्ट्रा लो एमिशन जोन 24×7 लागू होगी। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को उल्टा लो एमिशन जोन के मानकों के अनुकूल नहीं हैं इस प्रकार की कार, वैन तथा मोटरबाइक के लिए लिए प्रतिदिन 12.50 पौंड का शुल्क देना होगा जबकि लॉरी, बस तथा कोच के लिए यह शुल्क 100 पौंड होगा। लन्दन में 50% नाइट्रोजन ऑक्साइड वायु उत्सर्जन केवल वाहनों के कारण ही होगा। वायु प्रदूषण के कारण लन्दन को 3.7 अरब पौंड का नुकसान होता है।

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स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 रिपोर्ट

हाल ही में अमेरिकी संस्थानों हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट (HEI) तथा इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IMHE) ने हाल ही में वैश्विक वायु गुणवत्ता पर स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 नामक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों में से आधी मौतें चीन और भारत में होती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि PM 2.5 टाइप 2 मधुमेह का तीसरा सबसे बड़ा कारक है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में PM 2.5 का स्तर चार से पांच गुणा अधिक है।
  • 2017 में दक्षिण एशिया में PM 2.5 सर्वाधिक था। इस क्षेत्र में भूटान में PM 2.5 का स्तर सबसे कम है।
  • जिन 10 देशों में PM 2.5 सबसे कम है : मालदीव, अमेरिका, नॉर्वे, एस्टोनिया, आइसलैंड, कनाडा, स्वीडन, न्यूजीलैंड, ब्रूनेई तथा फ़िनलैंड।
  • विश्व में औसतन वायु प्रदूषण से सामूहिक जीवन आकांक्षा में 1 वर्ष तथा 8 महीने की कमी आई है।

भारत के सन्दर्भ में मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में PM 2.5 के मुख्य स्त्रोत इस प्रकार हैं : घरों में इंधन के ज्वलन से निकलने वाला धुआं, निर्माण, सड़क तथा अन्य कार्यों से उत्पन्न होने वाले धुलकण, कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट तथा उद्योग, ईंट उत्पादन, परिवहन, डीजल से चलने वाले उपकरण इत्यादि।
  • 2017 में भारत में 846 मिलियन लोग (60% जनसँख्या) घरेलु वायु प्रदूषण से प्रभावित हुई, चीन में यह आंकड़ा 452 मिलियन (32% जनसँख्या) रहा।

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